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महंगाई और बेबसी

कृषि मंत्री शरद पवार ने बढ़ती महंगाई के जल्दी काबू न आने के बारे में जो चेतावनी दी, उससे लगता है कि सरकार इसके आगे बेबस है। दूसरी तरफ मंदी को काबू में कर लेने के विश्वास से भरे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया इसे कोई बड़ा मुद्दा न मानते हुए, किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने और विकास की दर बढ़ने के बारे में आश्वस्त हैं।

एक ही सरकार के मंत्री और अफसर के चिंतित और निश्चिंत होने की इन दो दशाओं के बीच हकीकत यह है कि आम जनता महंगाई से परेशान है। यह बात सही है कि महंगाई शासक दल को चुनाव के मौके पर ज्यादा परेशान करती है, लेकिन जनता को सुबह-शाम तकलीफ देती है। नवंबर के महीने में बेकाबू होती महंगाई देखकर हर कोई हैरान है और यह सवाल पूछता नज़र आ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

आमतौर पर इस महीने में खरीफ की फसल आती है और त्योहार का सीजन गुजरने के बाद अर्थव्यवस्था की हालत ठीक ही रहती है। खूब खाने-पीने और पार्टियों के इस मौसम में अगर आमजन अपने भोजन में दाल, सब्जी की कमी कर रहा है तो इसका असर उसके स्वास्थ्य और देर-सबेर अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य पर भी पड़ना ही है। पर इससे अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा साफ पता चलती है।
  
महंगाई और विशेषकर खाद्य पदार्थो के ऊंचे दामों की दो वजहें साफ बताई जा रही हैं। एक तरफ उत्तर भारत में अच्छा मानसून न होने के कारण खरीफ के उत्पादन में 18 प्रतिशत तक की कमी आई है। जबकि दक्षिणी राज्यों में फसल के मौके पर आई बाढ़ ने खेती के उत्पादों को नुकसान पहुंचाया है। इससे बाजार में खाद्य वस्तुओं की सप्लाई घटी है।

दूसरी तरफ सरकार ने मंदी से निपटने के लिए मुद्रा की सप्लाई बढ़ाई, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में तो बहार लौट रही है, पर महंगाई बढ़ रही है। जाहिर है प्रोत्साहन पैकेजों के सहारे मंदी को गिरफ्त में लेकर अर्थव्यवस्था को विकास की पटरी पर डालने में सरकार कामयाब हुई है, लेकिन मुद्रास्फीति का इलाज उसे अभी करना है। विकास दर हासिल करने का काम सरकार वित्तीय नीति के माध्यम से कर रही है तो महंगाई रोकने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को मुद्रा नीति के माध्यम से द्रवता घटाकर करना चाहिए। इसके अलावा सरकार को सप्लाई बढ़ाने और खाद्य पदार्थो का आयात करने जैसे उपायों से जनता को राहत देनी चाहिए। सरकार की मौद्रिक स्थिति इतनी मजबूत है कि उसे इस काम में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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  • Web Title:महंगाई और बेबसी