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नक्सलवाद को प्यार से समझाना होगा

भारत में नक्सलवाद की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। भारत की सरकार इसके समाधान के लिए सैन्य कार्रवाई का सहारा ले रही है। क्या इस कार्रवाई से नक्सलवाद की अंदरूनी समस्या पूरी तरह से खत्म हो पाएगी? सैन्य कार्रवाई से शायद इस विकट समस्या को दबाया तो जा सकता है, लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता। इसे मिटाने के लिए उन कारणों पर नज़र रखनी होगी, जिसके कारण नक्सलवाद भारत में फल-फूल रहा है। अगर उचित ढंग से भूमि बंटाई का निबटारा हो, पुलिस की बर्बरता पर लगाम कसी जाए और जातिवाद की संकीर्ण भावना में परिवर्तन लाया जाए तो लोग क्यों हथियार उठाएंगे?
सन्नी कुमार, सुलतानगंज, भागलपुर, बिहार

मैच टिकट सस्ता हो
जो मैच अम्बेडकर स्टेडियम में हो रहे हैं उनकी टिकट 250 रुपए, 400 रुपए व 500 रुपए है। अगर कोई गरीब आदमी मैच देखना चाहे तो वह कैसे देख पाएगा? रेट ऐसे रखें जो आम पब्लिक को सूट करे। इतनी महंगी टिकट में कौन आएगा मैच देखने।
श्याम सुन्दर, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

नोटों की पहचान कराएं
नकली नोटों के कारण आम नागरिक परेशान हैं। क्या सरकार या रिजर्व बैंक का यह कर्तव्य नहीं है कि आम लोगों को असली और नकली की पहचान बताए और उन्हें नागरूक बनाए। समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर लोगों को जागरूक किया जा सकता है। जनता जागरूक हुई नहीं कि नकली नोटों का धंधा स्वत: ही बंद हो जाएगा।
सत प्रकाश ‘सनोठिया’, रोहिणी, दिल्ली

अब राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
केन्द्र सरकार के एक निर्णय के अनुसार 11 नवम्बर का दिन देश भर में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद जी के जन्म दिन के रूप में मनाया जाएगा। कितना अच्छा होगा कि इस दिन सभी लोग मिलकर शिक्षा पर मंथन करें और मौलाना आजाद के मंत्रित्वकाल के उस निर्भीक निर्णय को भी याद करें।
सुरेन्द्र नाथ दुबे, सेक्टर-7, गुड़गांव, हरियाणा

नज़रिया बदलें प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख और भारतीय रिजर्व बैंक के भूतपूर्व गनर्वर की बुधवार 21 अक्टूबर 2009 को जारी वर्ष 2009-10 की आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2008-09 में 23.40 करोड़ टन से घट कर 1009-10 में 22.30 करोड़ टन रहने से 1.10 करोड़ टन यानि वृद्धि दर दो प्रतिशत घटेगी। धान का रकबा 59.28 लाख टन घट गया है। रिपोर्ट ने सिफारिश की है कि रबी मौसम की फसल की सुरक्षा और विस्तार पर ध्यान दिया जाए। अर्थात अब देश को ऐसे कृषि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री की जरूरत है, जो भारत की 80 प्रतिशत जनता को महंगाई और 30 प्रतिशत जनता को भुखमरी से बचा सके। ब्रिटेन ने युद्धकाल में चर्चिल की पूजा की थी, लेकिन शांति काल में अयोग्य मान कर हटा दिया गया था। यदि प्रधानमंत्री बदलना संभव न हो तो उन्हें कृषि क्षेत्र पर नजरिया बदलना चाहिए।
ठाकुर सोहन सिंह भदौरिया, बीकानेर, राजस्थान

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