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‘वानर सेना’ के सामने निगम बेबस, शहर में बढ़ा आतंक

शहर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बेखौफ किसी के घर में घुसकर आर्थिक हानि करने के साथ हमला करने से भी वे नहीं चूक रहे। बच्चों को ज्यादा शिकार बना रहे हैं। सामना करने वाले को पंजों से घायल करना इनके लिए आम बात हो गई है। पिछले चौबीस घंटों में बल्लभगढ़ में दो बच्चों पर बंदर हमला कर चुके हैं। घरों में कैद बेबस लोग नगर निगम से गुहार लगाने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रहे। सख्त कानून के चलते हथियार से वार कर इनको मारने की हिम्मत भी कोई नहीं जुटा पा रहा।

इस गंभीर समस्या से निपटने को निगम ने तीन ‘अनट्रेंड’ कर्मचारी छोड़े हैं, जो पुराने जमाने के शिकारी की तरह एक पिंजरा लेकर दिनभर शहर में घूमते रहते हैं। इनको 25 रुपए एक बंदर पकड़ने का ईनाम निगम की तरफ से दिया जाता है। इतना खर्च तो पिंजरे में बंदर को फंसाने पर हो रहा है। एक बंदर को पकड़ने पर कई घंटे लग जाते हैं। शहर में मौजूद तीन हजार से ज्यादा बंदरों को पकड़ने पर कितना समय लगेगा? इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

बंदर पकड़ने वाले दस्ते के इंचार्ज भोलाराम यादव बताते हैं कि दिल्ली से बंदरों को पकड़कर दिल्ली नगर निगम फरीदाबाद की अरावली में छोड़ रही है। जो खाने की तलाश में शहरों में आ रहे हैं। एक बंदर पकड़ने को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, दिनभर भागना पड़ता है। अब तो बंदर पहचानने लगे हैं। एक बार छूटने वाले बंदर दोबारा पिंजरे के पास नहीं आते हैं।

स्वास्थ्य अधिकारी मुकेश कासनवाल का इस संबंध में कहना है कि बंदर पकड़ने के लिए दस्ता गठित किया हुआ है। लोगों की शिकायत आने पर वह बंदरों को पकड़ रहा है। निगम की वेबसाइट पर लोग शिकायत कर सकते हैं। कानूनी लिहाज से बंदरों को बिना कोई नशीली दवा खिलाए पकड़ना होता है। इसमें थोड़ी कसरत जरूर करनी पड़ती है।

यहां है बंदरों का ज्यादा आतंक
-सराय ख्वाजा
-सेक्टर-37
-अरावली के साथ लगते गांव बड़खल, अनखीर, भांखरी, अनंगपुर, लक्कड़पुर
-सेक्टर 10, 11, 12, 14, 15, 16, 28, 29, 21
-एनआईटी-1, 2, 3, 4, 5 नंबर
-बल्लभगढ़ शहर व आसपास की कालोनी

बंदर पकड़ने का बंदोबस्त
-तीन कर्मचारियों की टीम गठित की है।
-पिंजरे वाली एक गाड़ी दस्ते में शामिल है।
-दस्ते के कर्मचारी अनट्रेंड हैं।
-एक एनजीओ ने इनको कुछ दिन ट्रेनिंग दी।
-तनख्वाह के अलावा एक बंदर पकड़ने पर टीम को 25 रुपए प्रोत्साहन राशि।
-छत पर पिंजारा लगाया जाता है।
-बंदर को लालच देने के लिए अंदर व पिंजरे के आसपास केला या फिर अन्य खाने की वस्तु डाली जाती है। ताकि पिंजरे में आकर वह फंस जाए।
-जितने की ईनाम राशि मिलती है, उतना खर्च हो जाता है।
-अब तक 1500 बंदर दस्ता पकड़ चुका है।
-पकड़े बंदरों को जिला मेवात के फिरोजपुर झिरका के पास अरावली में छोड़ा जाता है।

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