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फ्लू

सामान्य जुकाम बिगड़कर गंभीर रूप धारण कर लेता है तो उसे फ्लू या इंफ्लुएंजा कहते हैं। मौसम के परिवर्तन, बरसात में भीगने के समय जब शरीर तापमान से तालमेल नहीं बिठा पाता तब वह जुकाम या फ्लू आदि का शिकार बन जाता है। योग के नियमित अभ्यास से इस समस्या को टाला जा सकता है।

आसन : सूर्य नमस्कार, जानुशिरासन, वज्रासन, सुप्त वज्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धनुरासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन के नियमित अभ्यास से जुकाम की समस्या को टाला जा सकता है। यहां पर धनुरासन के अभ्यास की विधि प्रस्तुत है।

विधि : पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। घुटनों से मोड़कर पंजों को पकड़ें। पैर और धड़ को जमीन से यथासंभव ऊपर उठाएं। श्वास को सामान्य रखते हुए आरामदायक अवधि तक रुकें, और पूर्व स्थिति में लौट आएं। हर्निया, हाइड्रोसील के रोगी इसका अभ्यास न करें।

प्राणायाम : सरल कपालभाति, भस्त्रिका तथा नाड़ीशोधन प्राणायाम का नियमित अभ्यास इस समस्या को जड़ से समाप्त कर सकता है। किन्तु इस रोग की गंभीर अवस्था में प्राणायाम का अभ्यास न कर केवल यौगिक श्वसन का अभ्यास करना चाहिए। ठीक होने पर प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।

ध्यान एवं योगनिद्रा : रोग की गंभीर अवस्था में भी इन क्रियाओं का अभ्यास बिस्तर पर लेटे-लेटे करते रहना चाहिए। इससे दर्द, बेचैनी आदि पर नियंत्रण होता है।

षट्कर्म : बुखार तथा रोग की गंभीर अवस्था में षट्क्रियाओं का अभ्यास नहीं करना चाहिए। किन्तु, यदि यह एक्यूट स्थिति में है तो नेति, कुजल का अभ्यास करें।

आहार : इस रोग की गंभीर अवस्था में यदि उपवास या आहार नियंत्रण किया जाए तो इसकी तीव्रता को टाला जा सकता है। फल, तरल आहार, सब्जियों का सूप फायदेमंद रहता है।

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