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अब इंजीनियरिंग में दाखिला नहीं आसान

सूबे के इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी दाखिला अब आसान नहीं होगा। जिन छात्रों के इण्टर में गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान (पीसीएम) में 60 फीसदी से ज्यादा अंक होंगे, वे ही प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके अलावा निगेटिव मार्किंग के लिए भी अभ्यर्थियों को तैयार रहना होगा। प्राविधिक विश्वविद्यालय जल्द ही प्रवेश परीक्षा के मानकों में इस तरह के बदलाव करने जा रहा है।

प्रवेश परीक्षा में सुधार के लिए पिछले दिनों प्राविधिक विश्वविद्यालय ने एक समिति बनाई थी। समय की बचत के लिए प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन करने और प्रश्न-पत्र कम करने पर भी कमेटी की बैठकों में कई सुझाव आए थे। इसी दौरान यह बात भी आई कि अभी ऐसे छात्र भी दाखिला पा जाते हैं, जो बाद में इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। उन्हें पास होना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रवेश परीक्षा के स्तर से ही स्क्रीनिंग कर दी जाए, ताकि वही छात्र दाखिला पाएं जो वास्तव में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के प्रति गम्भीर हों। इसमें दो प्रमुख बातें सामने आई हैं वे यह कि पीसीएम में जिनके अंक 60 फीसदी से अधिक हों उनको ही दाखिला दिया जाए और निगेटिव मार्किंग की जाए।

अभी तक 50 फीसदी से ऊपर अंक वालों को दाखिला दिया जाता है। प्रवेश परीक्षा में निगेटिव मार्किंग पर भी समिति के सदस्य सहमत हैं। कई साल पहले जब प्राविधिक विश्वविद्यालय नहीं बना था और यूपीसीट परीक्षा कराती थी, तब निगेटिव मार्किंग होती थी। कमेटी इन दो मुद्दों पर सहमत है। इन प्रस्तावों को सेंट्रल एडमिशन बोर्ड (कैब) की बैठक में रखा जाएगा। उसके बाद शासन से अनुमति ली जाएगी। प्रवेश परीक्षा मार्च में होनी है। उससे पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी है। इस बारे में प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रेमव्रत कहते हैं कि बात सिर्फ निगेटिव मार्किंग अथवा 60 फीसदी अंकों की नहीं है। हम पूरी प्रवेश प्रक्रिया पर समग्र विचार कर रहे हैं। इसमें शिक्षा मनोवैज्ञानिकों की मदद भी ले रहें हैं, जिससे प्रश्न-पत्र का प्रारूप ऐसा हो कि छात्र उसमें रुचि लें। कितने सवाल पूछे जाएं, कैसे सवाल हों, किस तरह परीक्षा कराई जाए, कितने प्रश्न-पत्र हों? इन सभी बातों पर हम विचार कर रहे हैं।

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