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माओवादी बातचीत के लिए राजी, लेकिन लगाई शर्त

माओवादी बातचीत के लिए राजी, लेकिन लगाई शर्त

सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियान के कारण कठिनाईयों का सामना कर रहे माओवादियों के एक वरिष्ठ नेता ने गुरुवार को कहा कि विद्रोही केन्द्र के साथ बातचीत को राजी हैं बशर्ते नक्सल प्रभावित राज्यों में तैनात अर्द्धसैनिक बलों को हटाने सहित उनकी कुछ मांगें मान ली जाएं।

शर्तों का खुलासा करते हुए वरिष्ठ माओवादी नेता किशनजी ने फोन पर बताया कि केन्द्र को पहले आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तैनात अर्द्ध सैनिक बलों का हटाना पडे़गा। दूसरा आदिवासियों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार किया जाए।

किशनजी ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों, दोनों को आदिवासियों से उनके साथ किए गए अत्याचार के लिए माफी मांगनी चाहिए, जिसके कारण आजादी के समय से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यह पूछे जाने कि माफी का स्वरूप क्या होना चाहिए किशनजी ने अधिक जानकारी दिये बिना कहा कि उन्हें आदिवासियों के पास आना पडे़गा और माफी मांगनी पडे़गी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बुधवार को आदिवासियों के बारे में दिये गये बयान पर प्रतिक्रिया पूछने पर वरिष्ठ माओवादी नेता ने कहा कि यह आंखों में धूल झोंकने के अलावा कुछ और नहीं है।

मनमोहन ने कहा था कि पिछले सालों में आदिवासियों का सुनियोजित तरीके से शोषण हुआ है तथा उन्हें आर्थिक एवं सामजिक रूप से प्रताड़ित किया गया है। उनके दिल जीतने की लड़ाई में उनसे व्यवहार करने के तरीकों को बदलना पडे़गा।

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