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माओवादी नेता कोबाड़ गांधी के नारको टेस्ट पर रोक

माओवादी नेता कोबाड़ गांधी के नारको टेस्ट पर रोक

शीर्ष माओवादी नेता कोबाड़ गांधी के नारको टेस्ट पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। नारको टेस्ट की अनुमति के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कोबाड़ ने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

न्यायाधीश इंद्रमीत कौर ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी, जिसने 31 अक्तूबर को 63 वर्षीय माओवादी नेता का नारको परीक्षण कराने की अनुमति दी थी।

अदालत ने यह आदेश गांधी के वकील रीबैका एम जॉन के इस तर्क के आधार पर दिया कि जब तक उच्चतम न्यायालय द्वारा नारको परीक्षण की संवैधानिक वैधता का फैसला नहीं कर लिया जाता, तब तक किसी आरोपी को ऐसे किसी परीक्षण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

उनकी वकील ने कहा कि उच्चतम न्यायालय उसके समक्ष लंबित मामले के मद्देनजर आरोपी पर इस प्रकार का परीक्षण कराने से लगातार इनकार करता आ रहा है। न्यायालय की संविधान पीठ ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

उच्च न्यायालय ने पुलिस को नोटिस जारी करने के साथ ही उसे 14 दिसंबर तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

गांधी ने उच्च न्यायालय से इस तर्क के आधार पर संपर्क किया था कि उसे खुद के खिलाफ सबूत देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के तहत उसके अधिकार का उल्लंघन है और उसने परीक्षण के लिए अपनी मंजूरी नहीं दी है।

निचली अदालत ने 31 अक्तूबर को पुलिस को गांधी का नारको परीक्षण कराने की अनुमति दी थी। इसके पहले जांच एजेंसी ने अदालत में कहा था कि वह पूछताछ के सभी वैज्ञानिक तरीके अपनाने के बावजूद गांधी से सभी जानकारी हासिल कर पाने में सक्षम नहीं हो पाई है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अदालत ने यह आदेश दिया और कहा कि 58 वर्षीय गांधी परीक्षण के लिए शारीरिक तौर पर तंदुरुस्त है।

इससे पूर्व, एम्स के एक विशेष मेडिकल बोर्ड ने गांधी का मेडिकल परीक्षण किया था और यह कहते हुए अदालत में रिपोर्ट सौंपी थी कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो नारको एनालिसिस परीक्षण का सामना कर सकता है।

इस आदेश को चुनौती देते हुए गांधी ने कहा कि इस प्रकार के जबरन परीक्षण की वैधता अभी भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि मामला उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के समक्ष लंबित है, जिसने इस मामले पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किए गए गांधी ने कहा कि मजिस्ट्रेट को उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। गांधी को राष्ट्रीय राजधानी से सितंबर में गिरफ्तार किया गया था।

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