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दो टूक (05 नवम्बर, 2009)

महंगाई के खिलाफ बोलने वालों को दकियानूस माना जाता है। यह सही है कि पहले के मुकाबले लोगों की आय बढ़ गई है, जो साइकिल पर चलते थे, आज वे मोटरसाइकिल और कार की सवारी कर रहे हैं। लेकिन अधिकतर लोग इतने खुशकिस्मत नहीं हैं। 

खाद्यान्न और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में बस का सफर भी महंगा हो गया है। एक-दो रु. का कोई टिकट नहीं, मानो सरकार की नजर में इनकी कोई अहमियत नहीं। जीवन का पर्याय माना जाने वाला पानी भी दिल्लीवासियों को अब तिगुने दाम में मिलेगा। सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह इस पर लगाम लगाएगी। लेकिन सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में आम आदमी भी भगवान भरोसे है।

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