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घाटा तो डीटीसी का बहाना है बस

एक आम आदमी के मन में बार-बार यह प्रश्न उठता है कि वह तो डीटीसी में किए सफर का पूरा पैसा देता है, फिर भी डीटीसी को घाटा क्यों होता है? तो शायद इसका उत्तर है, डीटीसी में फैला भ्रष्टाचार। जब डीटीसी बसें ब्लू लाइन बसों के पीछे-पीछे चलेंगी, डीटीसी और ब्लू लाइन बसों के ड्राइवरों में पहले से ही सांठ-गांठ होगी और डीटीसी बसें बेवजह यहां-वहां घंटों खड़ी रहेंगी तो घाटा तो होना ही है। लेकिन डीटीसी ड्राइवरों और परिवहन निगम की यह नाकारी दिल्ली सरकार को नजर नहीं आती। नजर आता है तो सिर्फ घाटा। और उसका ठीकरा आखिर में बस किराया में बढ़ोतरी के रूप में आम जनता पर फोड़ा जाता है।
मनोज रायकवार, जामिया, नई दिल्ली

युवा अरमानों पर पानी फेरा
केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ही अवसर देने की अपनी मंशा जताकर लाखों युवाओं के अरमानों पर पानी फेर दिया है। इससे पहले अर्जुन सिंह ने ओबीसी के आरक्षण को लेकर जो बवाल कटवाया था, उससे लगता है कि जो भी केन्द्र में मानव संसाधन मंत्री बनेगा वो अपने तुगलकी निर्णयों से किसी ओर का तो नहीं पर शिक्षा का भट्ठा अवश्य बैठा देगा। सिब्बल साहब! आप दिल्ली के अंग्रेजी स्कूलों से देश के बच्चों के बौद्धिक स्तर का आंकलन न करें। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व बिहार के सरकारी स्कूलों की दशा भी दिखवाएं, जहां मिड डे मील का लालच देकर विद्यार्थियों को स्कूलों तक लाया जाता है और टूटे-फूटे कमरों में बिना संसाधनों के सौ बच्चों पर एक  अध्यापक होता है।
अश्वनी गुप्ता, डोर्डवाला, देहरादून

भारत महासंघ पर हो विचार
यूरोपीय संघ बनाने वालों ने एशिया के देशों में विभाजन तथा युद्ध के बीज बो कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। एशिया संघ, विश्व संघ स्थापना के लिए भारत, लंका, म्यांमार, चीन तथा जापान देशों का महासंघ बनाने के लिए 1900 ई. की स्थिति का भारत संघ बनाया जाना चाहिए।
डॉ. उमा पाण्डेय, मानवता कुलम, कजर्न रोड हॉस्टल, नई दिल्ली

दिवाली में दीवाला
दीवाली पर लक्ष्मी पूजा हेतु दीये के चारों ओर रखे दस हजार के नोट जलकर राख हो गए। गलती यह हुई कि पंखा चला कर छोड़ दिया। दीवाली पर दीवाला ही निकल गया। पटाखों से हर साल न जाने कितने धन-जन और अंगों की बर्बादी होती है और हवा और ध्वनि प्रदूषण कर असह्य जहर घोल दिया जाता है। कितनी जगह आग लगती है और कितना नुकसान होता है। सरकार पटाखों को पूरी सख्ती से रोके और जरूरी हिदायत भी देती रहे।
वेद, नरेला, दिल्ली

कॉल ड्रॉप की समस्या
देश में मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां अपने ग्राहकों को कॉल ड्राप होने की समस्या से छुटकारा नहीं दिला पा रही हैं। बात करते-करते अचानक फोन कट जाना या कॉल रिसीव करने के बाद भी दूसरी ओर से आवाज न आने जैसी समस्याएं आम हैं। कॉल ड्रॉप होने से ग्राहकों का ही नुकसान होता है। पैसे भी लग जाते हैं और बात भी नहीं हो पाती।
जोगिंदर सिंह, मोहाली

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