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प्राइमरी शिक्षकों को पढ़ाया स्कूल प्रबन्धन का पाठ

दो कक्षाओं को साथ-साथ पढ़ाएं तो एक ही विषय का चयन करें। यदि गणित पढ़ा रहे हैं तो छोटी कक्षा के बच्चों को उसी विषय के हल्के और बड़ी कक्षा के बच्चों को उनके स्तर के सवाल बता सकते हैं। जब एक कक्षा छोड़कर दूसरी में जाएं तो पहली में मॉनीटर का उपयोग करें। उसे कोई पाठ दोहराने को कहें और आप दूसरी कक्षा में नए पाठ पढ़ा सकते हैं।

स्कूल प्रबन्धन के ऐसे ही गुर बुधवार को एक कार्यशाला में प्राइमरी के शिक्षकों को सिखाए गए। राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला वैकल्पिक ऊर्जा शोध विकास एवं प्रशिक्षण केन्द्र में शुरू हुई। तीन दिवसीय इस कार्यशाला में 26 जिलों के 78 चुनिन्दा शिक्षकों को बुलाया गया है। राज्य स्तर पर यह कार्यशाला तीन चरणों में पूरी होनी है। दूसरी कार्यशाला नौ से 11 और तीसरी कार्यशाला 12 से 14 नवम्बर तक चलेगी। इन कार्यशालाओं से तैयार 200 से अधिक मास्टर ट्रेनर जिलों में ब्लॉक संदर्भदाताओं को यह प्रशिक्षण देंगे। उसके बाद ब्लॉक स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित कर इसी महीने प्रदेश भर के एक लाख पांच हजार प्रधानाध्यापकों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्य रूप से इस कार्यशाला का मकसद कम शिक्षकों में ज्यादा कक्षाएं लेने के तरीके बताना है। इससे शिक्षकों की कमी के बावजूद बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकेगी। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि समय सारिणी लचीली बनाई जाएगी, जिससे एक स्कूल में दो या तीन शिक्षक सभी पांच कक्षाओं में पढ़ा सकें। मॉनीटर की विशेष भूमिका के बारे में भी बताया गया। हर कक्षा से एक-दो ऐसे बच्चे छांट लिए जाएं जो पढ़ने में ठीक हों। शिक्षकों की कमी होने पर वह पढ़ाई हुई विषय सामग्री को दोहराने में मदद कर सकेंगे। मास्टर ट्रेनर्स को दत्तात्रेय गोखले, जे.पी.ओझा, शैलबाला, पाल, अहिबरन सिंह यादव, सुदर्शन यादव और विद्याधर सहित कई विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके जरिए तीन चरणों में सभी 70 जिलों से तीन-तीन शिक्षकों को प्रशिक्षत करके 200 से अधिक मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाएगा।

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