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कामकाज ठप करेंगे निर्माण निगम के फील्ड वर्कर्स

उप्र राजकीय निर्माण निगम में 35 साल से काम कर रहे फील्ड वर्कर्स ने कामकाज ठप कर देने की धमकी दी है। इस बात का निर्णय निगम में काम कर रहे करीब एक हजार से अधिक फील्ड वर्कर्स ने बुधवार को लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि निगम में अवर अभियंता से प्रबंध निदेशक के लिए सारे सेवा लाभ हैं, पर फील्ड वर्कर्स को हाशिए पर रखा गया है। सुपरवाइजर, ऑपरेटर, संदेशवाहक जैसे पदों पर काम कर रहे फील्ड वर्कर्स में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनको न तो नियमित किया गया और न ही समयमान वेतनमान मिला। पहले से हताशा के शिकार फील्ड वर्कर्स को छठे वेतनमान मिलने की भी आस नहीं है। सार्वजनिक उद्यम विभाग ने निगमों में काम कर रहे कार्य प्रभारित कर्मचारियों को अलग से छठे वेतनमान की सिफारिश लागू करने के लिए अलग से आदेश जारी करने की बात कहकर अड़चन खड़ी कर दी है।

मात्र 5 से 8.50 हजार रुपए के वेतन पर गुजारा कर रहे फील्ड वर्कर्स के लिए कोई सेवा लाभ न होने के कारण ही उनको एक पद-एक वेतन पर ही रिटायर होना पड़ रहा है। संगठन के अध्यक्ष सुरेश कुमार यादव व महामंत्री सहजराम वर्मा ने बताया कि अदालत के आदेश पर विवश होकर निगम को समान कार्य-समान वेतन का सिद्धांत लागू करना पड़ा है। इसके अलावा मृतक आश्रित, पेंशन, जीपीएफ जैसे सुविधाओं पर निगम प्रशासन ने टालू रवैया बना रखा है। 200 से लेकर पांच हजार करोड़ के टर्न ओवर के निगम के निचले पायदान पर खड़े फील्ड वर्कर्स ने एमडी पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूनिटों पर ठेका प्रणाली लागू कर दी है।

फील्ड वर्कर्स के काम भाड़े के कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इस सौतेले व्यवहार के खिलाफ कई बार आवाज उठाने के बावजूद भी कोई कार्रवाई न होने से नाराज फील्ड वर्कर्स ने 16 नवम्बर से कामकाज ठप करने का निर्णय ले लिया है। हालांकि, निगम के एमडी सीपी सिंह ने उसी दिन फील्ड वर्कर्स को वार्ता के लिए भी बुलाया है।

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