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रामदेव पर भड़की रामनगरी

राम की नगरी अयोध्या जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के फतवे और इस मंच पर योग गुरु रामदेव के मौजूद रहने पर भड़क उठी है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ देश के कई प्रमुख पीठों के पीठाधीश्वर और धर्माचार्यों ने साफ कहा है कि योग गुरु रामदेव और गृहमंत्री पी.चिदम्बरम देश से माफी मांगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार में 10 नवम्बर को होने वाली बैठक में इस फतवे पर निर्णायक फैसला करने का एलान किया है।

अखिल भारतीय षड्दर्शन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि वन्देमातरम् भारत माता व देश का वंदन है। यदि उन्हें भारत माता से प्रेम नहीं तो किसी और देश में रहने के बारे में सोचें। उन्होंने देवबन्द के मंच पर गृहमंत्री की मौजूदगी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसी का नतीजा है कि अलगाववादी तत्वों के हौसले बुलन्द हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन्देमातरम् पर फतवा जारी करने वाले मंच पर रामदेव का होना और चुप रहना यह साबित करता है कि उनकी देशभक्ति में व्यवसायिक दृष्टिकोण आड़े आ रहा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कुम्भ की तैयारियों पर 10 नवम्बर को होने वाली बैठक में फतवे पर महत्वपूर्ण फैसले किए जाएंगे।

रामनगरी के उदासीन ऋषि आश्रम में आयोजित गुरुजन स्मृति श्रद्धांजलि समारोह में भी बुधवार को तनाव रहा। यहां देश भर से जुटे शंकराचार्यों, प्रमुख पीठों के पीठाधीश्वरों और अन्य प्रमुख हिन्दू धर्माचार्यों ने भी वन्देमातरम् पर फतवे और जमीयत के मंच पर रामदेव व गृहमंत्री की मौजूदगी व फतवे को लेकर चुप्पी पर गुस्से का इजहार किया। जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि वन्देमातरम् पर फतवा देश का दुर्भाग्य है। धार्मिक स्वतंत्रता व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन देश के प्रति भी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

नैमिष पीठाधीश्वर विद्या चेतन महाराज ने कहा कि भारत माता, राष्ट्रीय ध्वज व वन्देमातरम् तीनों को भारतीय एक ही रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर फतवे से लगता है कि जमीयत का भारतीय संविधान पर विश्वास नहीं रह गया है। मातृभूमि की वन्दना इस्लाम के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस मंच पर वन्देमातरम् का अपमान हुआ वहां रामदेव के जाने से करोड़ों भारतीयों की भावना आहत हुई है। रामदेव का वन्देमातरम् पर फतवे पर मौन स्वीकृति देना शर्मनाक है।

अखिल भारतीय साधु-समाज के केन्द्रीय मंत्री व दूधेश्वर पीठ के पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरि ने कहा कि रामदेव पूरे देश से माफी मांगे। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चले। कल्कि पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णा ने कहा कि वन्देमातम के अपमान पर पी.चिदम्बरम की चुप्पी से देश में अलगाववादी मजबूत होंगे। गुजरात के महा मण्डलेश्वर अलखगिरि ने कहा कि वन्देमातरम का विरोध भारतीय भूमि और संस्कृति का विरोध है। उन्होंने गृहमंत्री से पूछा कि राष्ट्रध्वज के अपमान पर जो सजा मिलती है, राष्ट्रीय गीत के अपमान पर वह सजा वो जमीयत के उलेमाओं को क्यों नहीं दिलवाते?

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