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एकाउंट ऑफिसर ने उठाए कमरों के निर्माण पर सवाल

सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत जिले में निर्माणाधीन 205 कमरों के कार्यों पर ब्रेक लग गया है। फिलहाल एक दर्जन स्कूलों को यूटिलिटी सर्टिफिकेट (यूसी) मिलने के बाद बीस लाख रूपये की दूसरी किश्त जारी नहीं की जा सकी है। इन कमरों को अगली किश्त देने पर एकाउंट ऑफिसर ने असहमति जताई है। इसका समाधान स्थानीय स्तर पर अभी नहीं हो सका है। अब मामला एसपीडी के सामने रखा जाएगा। एओ के ऐतराज से कमरों के लिए धनराशि जारी करने के तरीके पर ही सवालिया निशान लग गए हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में कमरे का निर्माण करवाया जाता है। सभी स्कूलों को आवश्यकता अनुसार ग्रांट जारी की जाती है। वर्तमान सत्र में जिले में 205 कमरों का निर्माण किया जा रहा है। विभाग की ओर से एक कमरे के लिए 2 लाख 84 हजार और दो कमरों के लिए 5 लाख 5 हजार रूपये का प्रावधान है। जिले के सभी स्कूलों को पहली के बाद दूसरी किश्त जारी कर दी गई, लेकिन दस स्कूलों को दूसरी किश्त जारी नहीं की जा सकी है।

सूत्रों के अनुसार एसएसए के एकाउंट अधिकारी ने इन स्कूलों को दूसरी किश्त जारी करने में सवाल उठा दिए हैं। एओ के अनुसार दूसरी किश्त जारी करने के लिए कराए गए कार्यों की चेक लिस्ट भी अन्य कागजों के साथ लगी होनी चाहिए, जो नहीं है। जबकि इंजीनियर के अनुसार, स्टेट प्रोजेक्ट निदेशक ने एक बैठक में चेकलिस्ट को जरूरी नहीं बताया था। इसी आधार पर अभी तक स्कूलों को धनराशि जारी की जाती रही है।

स्कूलों में कमरे के निर्माण लिए सभी मानकों को पूरा करने के लिए भवन निर्माण नाम से संदर्शिका गांम पंचायत और विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। इसी संदर्शिका में चेक लिस्ट की बात की गई है और इसी को आधार मानकर एओ ने फाइल पर साइन करने से असहमति जताई है। सूत्रों के अनुसार अब तक संदर्शिका के नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से पैसा जारी किया जाता रहा है।

मंगलवार को जिला मौलिक अधिकारी और एसएसए के जिला प्रोजेक्ट संयोजक ज्योति चौधरी के इस मामले में काफी माथापच्ची के बाद भी मामला सुलझ नहीं सका है। डीईईओ के अनुसार इस बारे में एसएसए के चेयरमैन एडीसी के सामने बात की जाएगी, ताकि इसका सही समाधान निकाला जा सके। हालांकि डीईईओ और एडीसी के आदेश पर धनराशि जारी की जा सकती है। लेकिन अभी किसी की भी ओर से  पहल नहीं की गई है। एओ के ऐतराज से कमरों के लिए जारी पैसे पर सवालिया निशान लग गए है। आखिर अन्य स्कूलों को धनराशि कैसे दी गई।

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