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पहले मजिस्ट्रेट की जांच, फिर होगा अंग दान

मानव अंगों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने अब हर मंडल में निगरानी समिति बना दी है। कमिश्नर को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। कमिश्ना हर हफ्ते अथॉरिटी की मीटिंग लेंगे और अंग दान करने वाले लोगों को एनओसी जारी करेंगे। खास बात यह है कि जब भी अंग डोनेशन का मामला आएगा तो पहले उसकी मजिस्ट्रेट से जांच कराई जाएगी। डीएम की रिपोर्ट के बाद ही ऑपरेशन की इजाजत दी जाएगी।

अफसरों के मुताबिक, मानव अंग प्रत्यारोपण की निगरानी के लिए जो समिति बनाई गई है, उसे प्राधिकरण समिति का नाम दिया गया है। मंडलायुक्त इसके अध्यक्ष होंगे। साथ ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल या कुलपति सदस्य होंगे। इसी तरह मेडिकल कॉलेज के सजर्री विभाग के अध्यक्ष, नेत्र विभागाध्यक्ष, संबंधित सीएमओ भी इस समिति के मैंबर होंगे। दरअसल, अवैध रूप से मानव अंग प्रत्यारोपण के मामले देश और प्रदेश में लगातार सामने आते रहे हैं। मानव अंग तस्करी की घटनाएं भी हो रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने अब नई व्यवस्था लागू की है।

मंडलायुक्त एसके शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजकर नई व्यवस्था से अवगत करा दिया है। साथ्‍ा ही हिदायत दी है कि यदि कोई व्यक्ति किसी आदमी को अपना कोई अंग दान करना चाहता है, तो खुद डीएम दोनों का प्रोफाइल चैक कराए और कमेटी के पास भेजने से पहले उसकी मजिस्ट्रेट से जांच भी करवाए। इसके बाद कागजातों को खुद प्रमाणित करें।

इसके बाद मामला कमेटी की बैठक में रखा जाएगा। इसमें दान दाता और अंग लेने वाले व्यक्ति के प्रतिनिधियों को भी शामिल होकर वजह साफ करनी होगी। इसके बाद ही ऑपरेशन के लिए एनओसी जारी की जाएगी। एडीएम सिटी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि मानव अंग प्रत्यारोपण के लिए नई व्यवस्था के बारे में प्रशासन ने सम्बंधित अफसरों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

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