DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

विकास कार्यों के बाद निगम चुनाव खर्च को लेकर परेशान

आर्थिक संकट से जूझ रहे नगर निगम को अब चुनाव खर्च की चिंता सताने लगी है। स्थानीय निकाय ने चुनाव का खर्च नहीं उठाया तो निगम कहां से पैसों का बंदोबस्त करेगा? इसे लेकर अफसरों ने मंथन शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ चुनाव आते देख पार्षद विकास कार्यों को लेकर प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं।

निगमायुक्त सीआर राणा खजाने में पैसे न होने पर बड़े प्रोजेक्टों को पहले ही रोक चुके हैं। मंगलवार को साप्ताहिक बैठक में इंजीनियर शाखा के अफसरों को भी खाते में पैसों की स्थिति जाने बिना इस्टीमेट बनाने पर फटकार लगा चुके हैं। फाइनेंस कमेटी की बैठक में भी पैसों के अभाव में मंगलवार को विकास कार्यों की फाइलें रोक दीं। अब तो अफसरों पर फाइलों को छिपाने का आरोप तक पार्षद लगाने लगे हैं।

बुधवार को मेयर ब्रह्मवती खटाना अपनी दो फाइलों को लेकर फाइनेंस कंट्रोल एलआर विरमानी से उलझ पड़ीं। श्री विरमानी फाइल न आने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने लगे। कमरे में फाइलों की जांच तक की गई, लेकिन फाइलें नहीं मिली। गुम होने पर उपमेयर बसंत विरमानी भी एक ही विकास कार्य के लिए दो बार फाइलें बनवा चुके हैं। विरमानी का आरोप है कि शरारत की नीयत से उनकी फाइलें गुम करवा दी जाती हैं, ताकि उनके वार्ड में विकास कार्य न हो पाएं। जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ शिकायतें भी निगमायुक्त से उपमेयर कर चुके हैं।

बहरहाल, विधानसभा चुनाव के बाद निगम के चुनाव होने हैं। अगले वर्ष मार्च तक निगम का कार्यकाल खत्म होगा। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से रुके अपने वार्ड के विकास कार्यों को जल्द पूरा करवाने की दौड़ में पार्षद लग गए हैं। ताकि जनता के बीच वोट मांगने के लिए जा सकें। उधर, निगमायुक्त ने पैसों के अभाव में फाइलों को रोक दिया है। जनता पर पकड़ कमजोर होती देख पार्षदों ने निगम में डेरा डालना शुरू कर दिया। अफसरों को विकास कार्यों के अलावा चुनाव के लिए राशि जुटाने की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय निकाय से पैसा नहीं मिला तो निगम को खुद खर्च करना पड़ेगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:विकास कार्यों के बाद निगम चुनाव खर्च को लेकर परेशान