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अठारह हजार बच्चे स्कूल से दूर, सर्वे में हुआ खुलासा

 शिक्षा को बढ़ावा देने की सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद जिले के हजारों बच्चों ने अभी तक स्कूल का मुंह नहीं देखा है। जिस उम्र में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा की आवश्यकता है, उस उम्र में वे घरों की चारदीवारी तक सीमित हैं। इसका खुलासा महिला एवं बाल विकास द्वारा स्कूली शिक्षा को लेकर कराए गए एक सर्वे में हुआ है। 3 से 6 साल तक की उम्र के बच्चों के बीच हाल में कराए गए इस सर्वे में फरीदाबाद और पलवल के 18154 नौनिहाल अभी तक बुनियादी शिक्षा से महरूम हैं।

जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की सफलता और इसकी आवश्यकता को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले में सर्वे करवाया। इसमें 3 से 6 साल की उम्र के बच्चों की बुनियादी शिक्षा लेने की रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार हजारों की संख्या में बच्चे अभी स्कूल का मतलब नहीं जानते हैं। इन बच्चों ने अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों का रुख भी नहीं किया है।

जिले में कई क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या, पढ़ने वाले बच्चों की अपेक्षा अधिक है। इनमें एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में स्कूली छात्रों की संख्या अनपढ़ छात्रों के सामने नगण्य हैं। जबकि कई क्षेत्रों में स्कूली छात्रों और स्कूल न जाने वाले छात्रों का अंतर काफी कम पाया गया है।

महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी अनिता नेहरा का इस संबंध में कहना है कि बच्चों का स्कूली शिक्षा न लेने का एक कारण जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की कमी है। सर्वे के बाद विभाग ने यह समस्या मुख्यालय भेजी है। साथ ही नए आंगनबाड़ी सेंटर्स खोलने की मांग की है। ताकि सभी बच्चों में स्कूल जाने का लगाव पैदा किया जा सके।

 

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