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बस किराया बढ़ने से सरकार पर बिफरे लोग

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में प्रस्तावित किराया बढ़ोत्तरी बुधवार से लागू हो गई। डीटीसी के साथ-साथ ब्लू लाइन बसों ने भी बढ़ा किराया वसूलना शुरू कर दिया है। सुबह अपने गंतव्य तक जाने वाले जब बस में चढ़े तो उन्हें 3,5,7 और 10 रुपये की जगह 5,10 और 15 रुपये का टिकट लेना पड़ा। अधिक किराया लिए जाने का रोष उनमें साफ झलक रहा था। बस में किराया बढ़ोत्तरी चर्चा का मुख्य विषय था। लोगों ने किराया बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार की दलील को नकारा। कई जगहों पर यात्री कंडक्टरों पर भी बिफरे। उधर, नए टिकट नहीं आने की वजह से कंडक्‍टरों ने 5 और 10 के पुराने टिकट से ही काम चलाया।

आईटीओ, कनॉट प्लेस, बस अड्डा आदि कई जगहों पर बस यात्री किराए को लेकर परेशान थे। उनका कहना था, शीला सरकार से यह उम्मीद नहीं थी। तीसरी बार हाथों में सत्ता सौंपते समय यह न सोचा था। लोगों ने सरकार की दलील को काटते हुए कहा कि लो-फ्लोर बस कम हैं। डीटीसी खटारा बस चला रही है, सेवाएं भी सही और नियमित नहीं है। शाम के वक्त बसों की तादाद काफी कम हो जाती है। चालक स्टैंड पर बस नहीं रोकते और कंडक्टर का व्यवहार अच्छा नहीं है। ऐसे में किराया बढ़ाना कहां तक उचित है। लोगों ने यह भी कहा कि सरकार को पहले सेवा में सुधार करना चाहिए। ब्लू लाइन बस की तरह अगर चालक व कंडक्टर मुस्तैद हो जाएं, तो कमाई ऐसे ही बढ़ जाएगी।

लोग न्यूनतम किराया पांच रुपये किए जाने से सबसे अधिक नाराज थे। लक्ष्मीनगर स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे प्रतीक ने बताया कि उन्हें प्रीत विहार तक जाना है, जिसकी दूरी एक किलोमीटर से कुछ अधिक है। अब तीन की जगह पांच रुपये का भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि न्यूनतम किराए को बढ़ाया जाना गलत है। दूरी और किराए को लेकर यात्री और कंडक्टर में कई जगहों पर बहस भी हुई। पहले जहां पांच का टिकट लग रहा था, वहां के लिए 10 रुपये मांगे जाने से लोग नाराज थे। 7 रुपये का टिकट समाप्त होने से लोग काफी भ्रमित थे।

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