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आत्मज्ञान की विधि कुण्डलिनी जागरण

आत्मज्ञान की विधि कुण्डलिनी जागरण

अकादमी आफ कुण्डलिनी योग एवं क्वान्टम सोल ने कुण्डलिनी जागरण के संबंध में अध्ययन और अध्यापन की शुरुआत की है। इस संस्था के संस्थापक डॉ स्वामी रविन्द्रानन्द दावा करते हैं कि मनुष्य में इस छुपी हुई ताकत का विस्फोट न्यूक्लियर विस्फोट के बराबर होता है।

अकादमी के संस्थापक डॉ. रवीन्द्र कुमार (पूर्व नाम) ने 1968 में आईआईटी (दिल्ली) से गणित विषय में पीएचडी की डिग्री हासिल की। जिसके बाद उन्होंने विश्व के 10 विश्वविद्यालयों में इस विषय को तीस वर्ष तक पढ़ाया। कई वर्षों तक अष्टांगयोग की साधना के बाद 1987 में अपने जिम्बाब्वे प्रवास के दौरान स्वामी जी को कुण्डलिनी जागरण का अनुभव हुआ। इसके बाद स्वामी जी ने अपना जीवन आध्यात्मिक और परा शक्तियों के अध्ययन में लगा दिया।

आध्यात्मिक क्षेत्र में उतरने से पहले डॉ कुमार ने गणित विषय पर चार पुस्तकें तथा 30 शोध पेपर लिखे। तत्पश्चात 20 पुस्तकें कुण्डलिनी, मृत्यु के बाद जीवन तथा योग साधना एवं शक्तिपात पर लिखीं। लगभग 25 शोध पेपर भी लिखे हैं।

स्वामी जी के अनुसार भौतिक और आध्यात्मिक ब्रह्मांड के अपने नियम हैं जो एक-दूसरे के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करते। कुंडलिनी जागरण के संबंध में स्वामी जी ने थियोसोफिक्ल सोसाइटी की संस्थापक मैडम ब्लॉवस्की, महाभारत के विख्यात धनुर्धर अर्जुन आदी महापुरुषों का उदाहरण देते हुए बताया कि जब तक कुण्डलिनी जागृत नहीं हो जाती तब तक मनुष्य अपने भीतर छुपे रहस्यों को उजागर नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि केवल इसी आधार पर वैश्विक रुप से धर्म की वैज्ञानिक अवधारणा का जन्म हो सकता है। स्वामी जी के प्रवचनों या सलाह लेने के लिए टेलिफोन नं 65956688 और 9891467723 पर समय लिया जा सकता है।

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