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केन्द्रीय एजेंसियों के सामने पथ निर्माण विभाग ने किया सरेंडर

राज्य सरकार ने केन्द्रीय पथ निर्माण एजेंसियों के समक्ष सरेंडर करने का मन बना लिया है। इसके पीछे सरकार की मंशा किसी भी सूरत में मार्च तक सभी स्टेट हाइवे का निर्माण पूरा करवाने की है। इसके लिए पथ निर्माण विभाग गुणवत्ता के मामले में समझौता करने को भी तैयार है। इसी का फायदा केन्द्रीय एजेंसियां उठा रहीं हैं।

दरअसल पथ निर्माण निर्माण को कार्रवाई करने से पीछे भागने के लिए निर्माण एजेंसियों ने मजबूर कर दिया है। स्थिति यह है कि चाहे सोनबरसा-बैजनाथपुर एसएच हो या सहरसा-सुपौल-सिंहेश्वर एसएच, हाजीपुर-वासुदेवपुर-समस्तीपुर पथ हो या सासाराम-विक्रमगंज-आरा, बिहटा-विक्रम-पाली हो या पूर्णिया-बनमनखी पथ।  निर्माण के साथ ही ये टूटने भी लगी हैं। पर इनकी शिकायत सुनने को सरकार तैयार नहीं है। विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने पथ निर्माण मंत्री, विभागीय सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री तक सड़क के खराब निर्माण की शिकायत की। कोई कार्रवाई नहीं हुई।  

अगला वर्ष प्रदेश का चुनावी वर्ष है। यह देखते हुए पथ निर्माण विभाग ने येन-केन-प्रकारेण निमार्णाधीन स्टेट हाइवे को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वैसे भी स्टेट हाइवे का निर्माण कर रहीं केन्द्रीय एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी और इरकॉन निर्माण पूरा करने का तय समय बीता चुकी है। राज्य सरकार ने उनको अतिरिक्त समय दिया है। ऐसे में केन्द्रीय एजेंसी गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहीं।

दरअसल एक वर्ष पूर्व दरभंगा और बक्सर जिले की दो सड़कों के मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई की तो एजेंसी कोर्ट चली गई और सड़क किर्माण का मामला अटक गया। अब तक वहां सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसी हश्र को देखते हुए विभाग अब कार्रवाई के बदले गुणवत्ता से समझौता करके भी सड़क का निर्माण पूरा करने के पक्ष में खड़ी हो गई है।

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