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लालू ने किया अगड़ा-पिछड़ा की सोच छोड़ने का आह्वान

अगड़ा-पिछड़ा बीते दिनों की बात हो गई। सबसे दोस्ती करो और समाज को पाटो। वंचितों के हक की लड़ाई लड़ो लेकिन अगले को चिढ़ाकर नहीं समझाकर। कुबोली (गंदी भाषा)छोड़ो और अपना औजार (वोट) ठीक करो। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने बिहार निर्माण की कल्पना के साथ यही संदेश राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैंठक में जुटे पार्टी नेताओं को दिया। इसी मैसेज को नीचे तक उतारने का आह्वान किया। जाति-पांति से ऊपर उठने का पाठ पढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि हर गांव में जाकर देखो जनता तुम्हारी पार्टी का सदस्य बनने के लिए इंतजार कर रही।

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बुधवार को आयोजित राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में भी राजद अध्यक्ष अपने खास अंदाज में ही थे। उन्होंने कहा कि देश मेंलीडरशीप का घोर अभाव है। बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों को खा जाने में लगी हैं। लोग हमारी उपलब्धियों को हवा हवाई करना चाहते हैं। सब कुछ छोड़के हम रेलवे के विकास में जुटे रहे। उसी माध्यम से राज्य को भी अथाह पैसा दिया।

लेकिन अब एगो रेलवे रिजर्वेशन करावे में केतना दिक्कत हो रहा है। दिल्ली ताकतवाली को पूछती है। उ बिहार नहीं है कि कौनो कोना से आये लोगों को पहचान मिल जाएगा। राजनीतिक प्रयोग की धरती हो गया है बिहार। यहां की जनता बहुत चेतनशील है। 

उन्होंने चुनाव की तैयारी में जुट जाने का आह्वान करते हुए कहा कि बिहार में पार्टी मजबूत होगी तभी दूसरे राज्यों में ताकत मिलेगी। 25 से 30 प्रतिशत लोगों के पास फोटो पहचान पत्र नहीं है। अब औजारे नहीं रहेगा त युद्ध मेंमारे न खाईगा। सबको पहचान पत्र बनाने मेंमदद करें। राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि भागवान किसी को मारते नहीं हैं, बुद्धिये भ्रष्ट कर देते हैं। यही हाल हो गया है सरकार का।

चार लाख बोरजगार पटना में जुटा अब सब गांवमें झेल मचा रहा है, टीचर सब त पहिले ही से खार खये बैठा है। सरकार का टाईम ओवर हो गया। खगड़िया में मुआवजा दिया आ पीडित परिवार भंजाने गया त चेके बाउंस कर गया। जे नीतीश को साथ देता है आकरे नाश कर देते हैं। जगन्नाथ मिश्र भी गये थे छब्बे बने। इंजीनियरिंग कॉलेज से नामें हटा दिया गया।

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