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भारतवंशी ने कॉलेस्ट्राल संबंधी अध्ययन में नयी संभावना जगायी

भारतवंशी ने कॉलेस्ट्राल संबंधी अध्ययन में नयी संभावना जगायी

भारतीय मूल के वैज्ञानिक के नेतृत्व में एक ब्रिटिश दल ने इस बात का पता लगाया है कि शरीर में खराब कॉलेस्ट्राल को कम करने के लिए मानक स्टैटिन उपचार के साथ अच्छे कॉलेस्ट्राल के स्तर को बढ़ाने की पद्धति से दिल के रोगियों में रक्तवाहिनियों के सिकुड़ने को कम किया जा सकता है।
   
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कार्डियोवस्कुलर चिकित्सा विभाग के रोबिन चौधरी के नेतृत्व में किये गये अध्ययन के नतीजे अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की पत्रिका के इस सप्ताह के अंक में प्रकाशित किये गये हैं।

चौधरी ने कहा कि यह पहला स्पष्ट साक्ष्य है कि स्टैटिन उपचार के साथ अच्छे कॉलेस्ट्राल का स्तर बढ़ाने की पद्धति का कारगर प्रभाव हो सकता है। निकोटिनिक एसिड के साथ उपचार के एक साल के बाद हमने एमआरआई स्कैन के इस्तेमाल से रोगियों में रक्तवाहिनियों की दीवार के आकार में कमी देखी।

रक्तवाहिनियों का सिकुड़ना या कठोर होना आथरोस्कलेरोसिस कहा जाता है, जिसके नतीजतन बाद में दिल का दौरा पड़ सकता है। इस समस्या वाले रोगियों के मानक उपचार में खराब कॉलेस्ट्राल स्तर को कम करने के लिए स्टेटिन दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि हमारे अध्ययन में पता चला है कि यह उपचार की नयी संभावना जगाता है और यदि जारी व्यापक अध्ययन में ऐसे ही नतीजे सामने आते हैं तो यह दुनियाभर में अनेक लोगों को फायदा पहुंचा सकता है। यह स्टेटिन ड्रग हदयाघात का जोखिम कम करने में और खराब कॉलेस्ट्राल के स्तर को कम करने में प्रभावी हैं।

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