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इस महीने प्रदेश में होगा सर्वाधिक विद्युत संकट

चालू महीना प्रदेश के लिए सर्वाधिक बिजली संकट वाला हो सकता है। जाड़े की वजह से मांग बढ़ने और प्रदेश की अनेक इकाइयों का अनुरक्षण के लिए बंद होना इसका कारण बताया जाता है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की लोड बैलेंस जेनरेशन रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने बिजली की मांग 6090 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकती है जबकि उपलब्धता 4096 मिलियन यूनिट से अधिक नहीं होगी।

इसलिए लगभग दो हजार मिलियन यूनिट (32.73 प्रतिशत) की कमे से प्रदेश को जूझना होगा। नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर ने इस स्थिति से निबटने के लिए
यूपी को 500 से एक हजार मेगावाट तक बिजली का बंदोबस्त करने की सलाह दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2008-09 में भी नवम्बर अत्यधिक विद्युत संकट वाला महीना था जब मांग 5716 मिलियन यूनिट तक पहुंच गयी थी जबकि उपलब्धता मात्र 4307 मिलियन यूनिट होने से 24.65 प्रतिशत बिजली की कमी का सामना करना पड़ा था। पिछले साल की 9446 मेगावाट के मुकाबले चालू नवम्बर में 9920 मेगावाट तक बिजली की मांग पहुंचने की संभावना है। लेकिन उपलब्धता में 3820 मेगावाट की कमी भारी परेशानी का कारण बन सकता है।

प्रदेश के अनपरा व पारीछा तथा एनटीपीसी की रिहंद-सिंगरौली सहित कई इकाइयां अनुरक्षण के लिए बन्द रहने से संकट और गहराने की आशंका है। नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर (एनआरएलडीसी) ने यूपी को शार्ट टर्म ओपन एक्सेज (एसटीओए) द्वारा अतिरिक्त 500 से एक हजार मेगावाट  बिजली की व्यवस्था करने की सलाह दी है।

वर्ष की पहली छमाही में बिजली कि मांग बढ़ने पर ग्रिड से 49.2 हर्ट्ज से कम फ्रिक्वेंसी पर ओवरड्राल किये जाने को गम्भीरता से लेते हुए यह हिदायद दी गयी है। उल्लेखनीय है कि गत सितम्बर में निर्धारित फ्रिक्वेंसी पर ओवरड्राल किये जाने से उत्तरी ग्रिड को खतरा पैदा हो गया था।

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