DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मुद्दाविहीन है कोलअसला का आखिरी चुनाव

सात तारीख को कोलअसला विधानसभा का आखिरी उप चुनाव है। इसके बाद इस विधानसभा का वजूद मिट जाएगा। अफसोस, इस उप चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। यह एक ऐसा मुद्दाविहीन उप चुनाव है, जहां पानी, बिजली की घोर कमी है पर ये चुनावी मुद्दा नहीं बन सके। बुधवार को हम थे कोलअसला विधानसभा क्षेत्र के उधोपुर, मरीयांव, थरी, फूलपुर बाजार, नथईपुर, हमीरपुरा, असवारी, नेवादा, पाही नेवादा, ताड़ी, अनई, बड़ागांव और बाबतपुर के गली-कूचों में। दजर्नों लोगों से बातचीत।

सभी मानते हैं कि पानी-बिजली की घोर समस्या है पर पता नहीं क्यों, किसी भी प्रत्याशी ने उनसे यह वादा नहीं किया कि अगर वो जीत कर आए तो आगामी दो वर्षो में उनके लिए बिजली और पानी का संकट नहीं रहेगा। कुछेक घोषणाएं बसपा सरकार के मंत्री कर जरूर गए पर समझदार मतदाता समझता है कि ये सब चुनावी लड्डू हैं। नथईपुर का 22 वर्षीय विजय कहता है : पानी नहीं है।

हमारे गांव में बिजली रानी के दर्शन नहीं होते। पड़ोस के गांव में है पर वहां भी बिजली कब आती है, कब जाती है यह ईश्वर ही जानता है। उसका बड़ा भाई टोकता है : अभी तो बिजली है। विजय कहता है : सात तारीख तक तो बिजली रहेगी ही। उसके बाद की सोचो न।

कोलअसला में कुछ काम हुए हैं। कुछ सड़कें वाकई अच्छी बनी हैं पर शेष की हालत खस्ता है। विकास की कुछ रौशनी बड़ागांव में दिखती है पर नथईपुर, हमीरपुरा, असवारी, नेवादा, पाही नेवादा जैसे इलाकों में कुछ हुआ हो, यह नहीं दिखता। कल, पांच नवंबर को जब चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा, उसके बाद सात नवंबर को सुबह से शाम तक मतदान होगा। दरअसल, एक ऐसे चुनाव के लिए जनता मतदान करेगी, जहां मूलभूत समस्याओं को मुद्दा न बनाए जाने की खीझ भी होगी। यह खीझ ही किसी भी प्रत्याशी का बंटाधार कर सकती हैं।

यों, यहां से सीट निकालना किसी के लिए भी आसान नहीं है। फूलपुर बाजार में पान की दुकान चलाने वाले बैरिस्टर कहते हैं : जो आजमाया हुआ है, उसे क्या आजमाना? जीतेगा वही जिसने काम किया हो। लेकिन, बैरिस्टर की बातों से सर्वथा अलग राय है असवारी के अजीत की। वह कहता है : हम ऐसे आदमी को वोट क्यों दें जो विकास कार्य न करवा सके?

हम ऐसे आदमी को वोट क्यों न दें जो सत्ता पक्ष का हो और जिसके सीने पर चढ़ कर हम काम करवा सकें? जाहिर है, यह उप चुनाव आसान नहीं है। वोटर बेहद जागरूक है। वह लुभावने नारों में नहीं फंसने वाला। नेवादा के हरिमन कहते हैं : जो सुख-दुख में काम दे, जो बेटी के ब्याह में दस मिनट के लिए ही आए, जो सर्वसुलभ हो, जो हमारी बातों को सुनें उसे ही वोट देंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मुद्दाविहीन है कोलअसला का आखिरी चुनाव