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अगले दो वर्षों में नौ प्रतिशत की दर से विकास

अगले दो वर्षों में नौ प्रतिशत की दर से विकास

योजना आयोग ने बुधवार को उम्मीद जताई कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2010-11 में आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी, जबकि इसके अगले साल इसके नौ प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में कहा था कि अर्थव्यवस्था की वद्धि दर के नौ प्रतिशत के स्तर तक पहुंचने में एक साल या इससे कुछ अधिक समय लग सकता है। आयोग की ओर से सम्मेलन के दौरान जारी एक दस्तावेज के मुताबिक 2010-11 और 2011-12 में मानसून सामान्य रहने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के उबरने की स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था के 2010-11 तक आठ प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।

दस्तावेज में कहा गया कि यदि निवेश विशेषकर बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश बढ़ और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का असर होने लगा तो 11वीं योजनावधि के अंतिम साल 2011-12 तक अर्थव्यवसथा की वृद्धि दर नौ प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है।

आयोग का कहना है कि यह आंकड़ा आशावादी है पर ऐसा नहीं है कि इसे हासिल करना असंभव है। आयोग ने कहा कि यदि 11वीं योजनावधि के अंतिम दो वर्षों में अर्थव्यवस्था उबरती है तो इस पंचवर्षीय योजनावधि के दौरान औसत वार्षिक वद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह वास्तविक लक्ष्य से कम है लेकिन 10वीं योजनावधि में रिकार्ड की गई दर के लगभग समान है।

आयोग ने कहा कि विश्व मंदी जैसे प्रतिकूल बाहरी घटनाक्रम के मद्देनजर 7.8 प्रतिशत की औसत वद्धि दर को अच्छी उपलब्धि माना जाना चाहिए। इसने कहा कि कषि क्षेत्र की वद्धि दर अगले साल छह प्रतिशत तक पहुंच सकती है और योजनावधि के अंतिम वर्ष में चार प्रतिशत की वद्धि दर हासिल कर सकते हैं। इस प्रकार 11वीं योजनावधि में कृषि क्षेत्र की औसत वद्धि दर 3.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है जो 10वीं योजनावधि के आंकडे 2.1 प्रतिशत से कहीं बेहतर होगी।

चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के बारे में दस्तावेज में कहा गया कि इस समय कोई भी आंकड़ा पूरी तरह अस्थायी होगा क्योंकि अप्रैल-जून की पहली तिमाही में औद्योगिक क्षेत्र को छोड़कर उत्पादन के आंकड़ों को लेकर ठोस जानकारी काफी कम है। आयोग ने कहा कि मौजूदा रुझानों के आधार पर हमने मौजूदा परिदृश्य में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर लगभग 6.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद की है। आयोग ने कहा कि उक्त आंकड़े इस अनुमान पर भी आधारित है कि धीरे-धीरे निर्यात में सुधार होगा।

इसने कहा कि 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर आधार अंक के आकलन के आधार पर मानी जा रही है, जब कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में ढाई प्रतिशत की गिरावट आएगी। यदि कृषि क्षेत्र में बहुत बुरा प्रदर्शन रहा और वद्धि दर में छह प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई तो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत पर सीमित हो सकती है।

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