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मंदी से प्रभावित हो सकता है भारत का परिधान निर्यात

अमेरिका के छोटे और मध्यम उद्योगों को ऋण देने वाले सीआईटी समूह का दिवाला पिटने से वहां भारत के परिधान निर्यात पर असर पड़ सकता है। सीआईटी ने अपने को दिवालिया घोषित करते हुए कानूनी संरक्षण आवेदन दे रखा है।

परिधान निर्यात संवद्र्वन परिषद [एईपीसी] के चेयरमैन राकेश वैद ने कहा कि भारत का अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले परिधान में से 80 प्रतिशत छोटे वेंडरों को भेजा जाता है। वैद ने कहा कि भारतीय निर्यात की ज्यादा पहुंच छोटे वेंडरों तक है इससे निश्चित रूप से भारतीय कंपनियों के निर्यात पर असर पडे़गा। भारत के तैयार कपड़ों को अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है।

2009-10 की दूसरी तिमाही से इसमें सुधार के संकेत मिल रहे हैं। जुलाई से सितंबर की तिमाही में परिधान निर्यात में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह गिरावट 17 प्रतिशत की थी। वैद ने कहा कि सीआईटी हालांकि अभी भी परिचालन करती रहेगी, लेकिन इस बात की संभावना काफी कम है कि वह पहले जैसे ही कर्ज मुहैया करा पाएगी। वैद ने कहा कि भारत के सालाना 10.17 अरब डालर के सालाना परिधान निर्यात में से तीन अरब डालर की हिस्सेदारी अमेरिका की है। खास बात यह है कि इससे ऋण के नियम बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

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