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नन्हे दोस्तों के नाटकों का उत्सव

नन्हे दोस्तों के नाटकों का उत्सव

‘एक था राज। बुलबुल नामक एक पक्षी से उसकी दोस्ती थी। उस बुलबुल के गीतों में अद्भुत मिठास और जादू था, जो सुनने वालों के सारे कष्ट मिटा देता था, लेकिन राजा को एक दिन अचानक एक मशीनी बुलबुल तोहफे में मिल गई। उसकी चमक-दमक और मस्ती भरे स्वर में राजा असली बुलबुल को भूल जाता था। उपेक्षित होकर असली बुलबुल चुपचाप वहां से चली गई। राजा ने गुस्से में महल की सारी खिड़कियां बंद करवा दीं, ताकि वह वापस न आ सके। कुछ समय बाद मशीनी बुलबुल खराब हो गई। इधर राजा इतना बीमार हो गया, जैसे कुछ ही समय का मेहमान हो। वह आखिरी बार बुलबुल का गाना सुनना चाहता था, पर मशीनी बुलबुल गाना नहीं गा सकती थी। उन्हें असली बुलबुल की याद आने लगी..।’

नन्हे दोस्तो, फिर क्या हुआ? तुम इसके आगे की कहानी के बारे में सोचने लगे न। शायद यह भी सोच लिया होगा कि असली बुलबुल आकर अपने गानों से राज को ठीक कर देगी। तुम जो सोच रहे हो, शायद वह हो भी सकता है। लेकिन जरा सोचो कि यह कहानी तुम्हें देखने को मिल जाए और वह भी किसी सिनेमा के पर्दे पर नहीं, बल्कि स्टेज पर, तो कितना मजा आए! अगर तुम सचमुच ऐसे मौके का इंतजार कर रहे हो तो इन दिनों राजधानी के मंडी हाउस में चल रहे बच्चों के नाटकों के उत्सव में क्यों नहीं जाते। इस उत्सव का नाम है ‘जश्ने बचपन’, जिसमें ऐसी एक से बढ़ कर एक कहानियों वाले नाटक हैं। राज और बुलबुल की दोस्ती वाला यह नाटक भी तुम यहां 6 नवम्बर को देख सकते हो। यह नाटक हिन्दी में है और इसका नाम भी ‘बुलबुल’ ही है। राष्ट्रीय नाटच्य विद्यालय का नाम तो तुमने सुना ही होगा। यह विद्यालय मंडी हाउस के कई ऑडिटोरियम में तुम्हारे लिए एक से बढ़ कर एक नाटक प्रस्तुत कर रहा है।

राष्ट्रीय नाटच्य विद्यालय में बच्चों के नाटकों का एक अलग विभाग है, जिसका नाम है ‘संस्कार रंग टोली’। इसे अंग्रेजी में टीआईई भी कहा जाता है, यानी ‘थिएटर इन एजुकेशन’। यह विभाग तुम लोगों के लिए समर वर्कशॉप भी चलाता है और तुममें से बहुत सारे बच्चे तो इसके संडे क्लब के सदस्य भी बन चुके होंगे। यही टोली इस महोत्सव का पूरा संचालन करती है। यह उत्सव पहली नवम्बर से ही चल रहा है। पहले दिन इसका उद्घाटन जानी-मानी नाटककार और फिल्मकार सई परांजपे ने किया था। ये फेस्टिवल 14 नवम्बर तक चलेगा। इस बार तो इस 9वें जश्ने बचपन में 22 नाटक शामिल हैं, जिनमें से 9 नाटक हिन्दी में हैं। तुम्हें यह जन कर और खुशी होगी कि इस फेस्टिवल के लिए देश भर से 108 नाटकों का आवेदन आया था, जिनमें से तुम्हारे लिए सिर्फ 22 नाटकों का चयन किया गया। यानी, हर नाटक खास है।

5 नवम्बर को बांग्ला नाटक ‘अनमांतर’ और असमिया नाटक ‘जलोई रत्न’ दिखाया जएगा। 6 नवम्बर को मलयालम नाटक ‘कुंजिचिरकुकल’ और हिन्दी नाटक ‘बुलबुल’ प्रस्तुत किया जाएगा। 7 नवम्बर को फिर से बांग्ला नाटक ‘भूतुम भगवान’ और असमिया नाटक ‘काजीरंगात हाहाकार’ का मंचन होगा।

8 नवम्बर को हिन्दी के दो नाटकों का मंचन होगा, जिनका नाम है-‘राग-ए-वतन’ और ‘इन द क्लासरूम’। 9 नवम्बर को भी तुम हिन्दी के दो नाटक देख सकते हैं। ‘काय रे मोटच्या’ और ‘अंधेर नगरी चौपट राज’ को देखने में भी खूब मज आएगा। 10, 11 और 12 नवम्बर को तुम क्रमश: ‘मोयना मेलार भाओना’ (असमिया), ‘पांजरे पुराया पप्पा-मम्मी’ (गुजराती) और ‘बेप्पुतक्कड़ी भोलेशंकरा’ (कन्नड़) का आनन्द उठा सकते हो। अगर अंग्रेजी नाटक देखना पसंद करते हो तो 13 नवम्बर को ‘डे आई मैट द प्रिंस’ देख सकते हो। अगर कठपुतली का नाटक देखने में भी तुम्हारी रुचि है तो 13 नवम्बर को ‘शकार में राज का शाला’ का मज ले सकते हो। फेस्टिवल के आखिरी दिन यानी 14 नवम्बर को ‘ब्रrा राक्षस का नाई’ देख कर भी तुम्हें खूब मजा आएगा।

तुम सोच रहे होगे कि इन नाटकों को तुम देख कैसे सकते हो तो इसका बड़ा आसान उपाय है। समय रहते ही तुम अपनी पसंद के नाटकों का टिकट मंगवा लो। इन सभी नाटकों का मंचन मंडी हाउस में ही 4 ऑडिटोरियम में हो रहा है। सबसे ज्यादा नाटक Þश्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में दिखाए जाएंगे। इसके अलावा एलटीजी ऑडिटोरियम, अभिमंच और सम्मुख ऑडिटोरियम में भी कुछ नाटकों के शो होंगे। बच्चों को तो टिकट पर छूट भी दी गई है।

इन नाटकों को देखने के लिए बड़ों को जहां 40 रुपए का टिकट खरीदना पड़ेगा, वहीं तुम्हारे लिए टिकटों की कीमत सिर्फ 20 रुपए रखी गई है और सम्मुख ऑडिटोरियम में भी कुछ नाटकों के शो होंगे। दोस्तो,  तो क्या तुम तयार हो इन मनोरंजक व ज्ञानवर्धक नाटकों को देखने के लिए!

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