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विश्व कप को लेकर हाइप ना बनाएं: संदीप

विश्व कप को लेकर हाइप ना बनाएं: संदीप

कनाडा दौरे पर बदली हुई तकनीक के साथ अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भारतीय हॉकी टीम के नियमित कप्तान संदीप सिंह ने कोच जोंस ब्रासा के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि विश्व कप को लेकर हाइप बनाना गलत होगा क्योंकि अपेक्षाओं का दबाव नकारात्मक भी साबित हो सकता है।

पुणे में बुधवार से शुरू हो रहे अभ्यास शिविर में भाग ले रहे संदीप ने बातचीत में कहा कि विदेश में अच्छे प्रदर्शन से मनोबल बढ़ता है लेकिन मैं कोच (ब्रासा) की इस बात से सहमत हूं कि विश्व कप को लेकर अभी से हाइप बनाना गलत होगा। अपनी सरजमीं पर खासकर विश्व कप जैसे टूर्नामेंटों में हर टीम से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है। फिर चाहे हाकी हो या क्रिकेट। यह दबाव कभी नकारात्मक भी साबित हो सकता है।

भारत अगले साल फरवरी मार्च में विश्व कप की मेजबानी करेगा। दिल्ली में ही तीन से 14 अक्तूबर 2010 तक राष्ट्रमंडल खेल और फिर नवंबर में चीन के ग्वांगक्षू में एशियाई खेल होने हैं।

इस अनुभवी ड्रैग फ्लिकर ने बताया कि ब्रासा के आने के बाद से टीम की तकनीक बदल चुकी है और अब विशुद्ध यूरोपीय हाकी खेली जा रही है जिसके नतीजे अच्छे आये हैं।

उन्होंने कहा, दुनिया भर की बडी टीमें यूरोपीय हाकी खेलती है और कोच का जोर इसी पर है। हम अपने प्रतिद्वंद्वियों को उन्हीं की शैली में बेहतर जवाब देने की तैयारी में हैं और ये तैयारियां सही दिशा में जा रही है।

विश्व कप के अलावा अगले साल होने वाले दो बडे टूर्नामेंटों में सही समय पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बडी चुनौती बताते हुए संदीप ने कहा, अक्तूबर में हमें राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेना है और नवंबर में एशियाड होने हैं। इतने कम अंतराल में दो बडे टूर्नामेंटों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना बडी चुनौती है और हम इसे ध्यान में रखकर अभ्यास कर रहे हैं।

कनाडा और यूरोप दौरे पर अपने प्रदर्शन के बारे में इस ड्रैग फ्लिकर ने कहा कि वह बेहतर कर सकते थे।

उन्होंने कहा, दौरे अच्छे रहे लेकिन मैं और अच्छा प्रदर्शन कर सकता था। मैं वाइड शाट लेने और पेनल्टी कार्नर तब्दील करने पर और मेहनत कर रहा हूं। उम्मीद है कि आगे और अच्छा कर सकूंगा।

संदीप ने कनाडा दौरे पर शानदार फार्म दिखाते हुए सात टेस्ट में सात गोल दागे। कप्तानों की रोटेशन प्रणाली को नया प्रयोग बताते हुए उन्होंने कहा कि कोच ने कुछ सोचकर ही इसे आजमाया होगा।

उन्होंने कहा कि यह नया प्रयोग था और मैं इसके खिलाफ नहीं था। इससे नेतृत्व क्षमता की परख हुई है और मुझे लगता है कि इससे मैं और परिपक्व होकर निकला हूं।

जनवरी में चार देशों के पंजाब गोल्ड कप में भारतीय टीम की कमान संभालने वाले संदीप की अगुवाई में भारत ने 13 साल बाद अजलन शाह कप टूर्नामेंट जीता था।

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