DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हर कोई चाहता है चुनाव लड़ना

हरियाणा में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब क्षेत्र में पंचायती राज संस्थाओं, स्थानीय निकायों व चीनी मिल निदेशकों के चुनावों की सुबगुबाहट शुरू हो गई है। इन चुनावों के लड़ने के इच्छुक लोगों ने तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि इन चुनावों के होने में अभी छह महीने का समय शेष है, पर लोगों को उम्मीद है कि ये चुनाव भी समय से पहले कराए जा सकते हैं। गांवों में जहां पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर खेमेबंदी होने लगी है, वहीं शहर में नगर परिषद चुनावों को लेकर पार्षद बनने के इच्छुकों ने लोगों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। पार्षद बनने के इच्छुक लोगों ने नगर परिषद में बकाया भी जमा करा दिया है। चुनाव लड़ने के इच्छुकों को यह भी भय सता रहा है कि कहीं जिस पद पर वे चुनाव लड़ना चाहते है, वह पद आरक्षित न हो जाए। लगता है कि बहुत से लोगों के पास और कोई काम ही नहीं।
विक्रम जादौन, पलवल, हरियाणा

मत भूलो सर के साये को
क्या आपने कभी एक गरीब बाप की हालत के बारे में सोचा है? जी हाँ, जो कभी आपको दुखी नहीं देखना चाहता, आपको अच्छी शिक्षा, सभी सुविधाएं प्रदान करने के लिए दिन भर मेहनत करता है, पूरे परिवार का बोझ अपने कंधो पर उठाये बिना किसी के सहारे चलता रहता है। लेकिन जब वह बूढ़ा हो जाता है, जब उसके कमजोर  कंधे उस बोझ को उठाने के काबिल नहीं रह पाते और उसे भी जब आपके सहारे की जरूरत पड़ती है तो आप अपनी इंसानियत अपना फर्ज भूल जाते हैं और बीच भंवर में छोड़ कर चल देते हैं। अगर वह भी आपको इसी तरह बीच भंवर में छोड़ देता तो...?
तरुण वत्स, शाहदरा, दिल्ली

इस आग से बचें
बरसों से पाकिस्तान बारूद का गोदाम बना हुआ है। अभी तक तो वह हमारी तरफ पटाखे उछाल कर हमें परेशान करता था। पर अब खुद ही उस बारूद में झुलसने लगा है। यह सावधान होने का वक्त है, क्योंकि बारूद के गोदाम की आग सबसे पहले पड़ोसियों को ही परेशान करती है। फिलहाल तो यही जरूरी है कि सबसे पहले हम इस ताप से खुद को बचाएं और फिर हो सके तो इस आग को बुझाने में मदद करें।
श्रीमल विद्यालंकार, सिंहानी गेट, गाजियाबाद

राष्ट्र का सम्मान या अपमान?
आजकल एक गैर सरकारी संस्था आरटीआई के नाम पर नेशनल आरटीआई अवार्ड प्रदान करने के लिए जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। क्या कोई भी व्यक्ति/ गैर सरकारी संस्था राष्ट्र के नाम पर जारी होने वाले पुरस्कारों को प्रदान करने का मंच हो सकता है? यदि यही रिवाज भविष्य में भी जारी रहा तो राष्ट्रीय पुरस्कारों, राष्ट्रीय स्मारकों, राष्ट्रीय शब्द से जुड़े प्रत्येक संस्थान, आदि अपनी तरफ से कोई भी व्यक्ति प्रदान करने लगेगा, फिर राष्ट्र और राष्ट्रीय पुरस्कारों की अहमियत ही क्या रह जाएगी?
एस. जी. पल्ला

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हर कोई चाहता है चुनाव लड़ना