DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अल्पसंख्यक आयोग का उच्च शिक्षा सचिव को नोटिस

आजमगढ़ स्थित शिबली नेशनल कॉलेज में बीएड पाठ्यक्रम के लिए अल्पसंख्यक कोटे से दाखिले में पैदा हुई दुश्वारी का मामला राज्य अल्पसंख्यक आयोग पहुँचा है। आयोग ने इस मामले में प्रदेश के उच्च शिक्षा सचिव को नोटिस जारी किया है। पूरे मामले पर दो हफ्ते के भीतर सारे तथ्यों सहित आख्या पेश करने को कहा गया है।

शिबली नेशनल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा.इफ्तेखार अहमद ने आयोग को बीती 31 अक्तूबर को एक शिकायती पत्र भेज कर कहा था, कि यह कॉलेज अनुदानित अल्पसंख्यक संस्था है, जो स्वयं परीक्षा लेकर पिछले 15 वर्षों से पचास फीसदी कोटे का दाखिला लेती रही है। मगर 2007-08 से पूर्वाचंल विश्वविद्यालय यह कहकर पर्यवेक्षक भेजने से इनकार कर रहा है कि अल्पसंख्यक संस्थाओं में भी सिंगल विण्डो सिस्टम से ही प्रवेश दिया जाएगा। नतीजतन कॉलेज 2007-08 बीएड में अल्पसंख्यक कोटे की पचास सीटों पर दाखिला नहीं कर पा रहा है। आवंटित सौ सीटों में से पचास सीटें सामान्य श्रेणी से पूरी हो रही हैं, जबकि अल्पसंख्यक कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं।

कॉलेज के प्राचार्य ने आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि आईटी कॉलेज लखनऊ, मुमताज कॉलेज लखनऊ और हलीम कॉलेज कानपुर को उनके विश्वविद्यालयों की ओर से पर्यवेक्षक दिए गए और इन कॉलेजों ने पर्यवेक्षक के जरिए अल्पसंख्यक कोटे के बच्चों को दाखिले दिए हैं। 

पत्र में वर्ष 1995 में उच्च शिक्षा अनुभाग की ओर से जारी परिपत्र के हवाले से कहा गया है कि शिबली कॉलेज पूर्वाचंल विवि के मापदण्डों के अनुरूप बीएड में अल्पसंख्यक छात्रों का दाखिला ले रहा था, मगर इस साल बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा छत्रपति शाहूजी विवि, कानपुर से संचालित की गई। विवि ने यह कहा कि निर्धारित सौ सीटों में से पूर्व की भांति पचास सीट संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से और बाकी कॉलेज द्वारा पूरी की जाएंगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अल्पसंख्यक आयोग का उच्च शिक्षा सचिव को नोटिस