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लाल कॉरिडोर में तब्दील होता जा रहा है खड़गपुर

अनेकानेक नक्सल कहर को ङोलने के लिए अभिशप्त एवं कई बड़ी घटनाओं को ले सुर्खियों में रहा खड़गपुर माओवादियों द्वारा घोषित ‘लाल कारीडोर’ के रूप में तब्दील होता दिख रहा है। यह माओवादियों की इच्छा पर निर्भर है कि वे अनुमंडल न्यायालय को ध्वस्त करें, प्रखंड भवन को उड़ाएं, थाना पर हमला करें, जिला जज को बंधक बनाएं, जिला समाहरणालय पर पर्चा चिपकाएं, सीआरपीएफ कैंप रहे भवन को उड़ाएं या फिर वन विभाग के आश्रयणी को मलबे में बदल दें।

नया जनवादी राज्य कायम करने का दावा करने वाले माओवादी संगठन की इच्छा हुई तो जिला पुलिस कप्तान को उनके सहयोगी व वाहन सहित हवा में 50 फीट ऊपर लहराकर चिथड़ा बना दिया, मेला का निरीक्षण करने पहुंचे सैप जवानों को बकरे की तरह हलाल कर दिया अथवा किसी दबंग की गतिविधि उन्हें खली तो उसे घर से खींच कर मुर्गे की तरह सर से धड़ को अलग कर दिया। पिछले लगभग सात सालों से खड़गपुर और आसपास का इलाका यही सब झेलरहा है।

हां घटना के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा माओवादियों के खिलाफ एक्शन प्लान, कांबिंग ऑपरेशन व कई तरह के जवाबी कार्रवाई की बात कही और दुहराई जाती है, लेकिन देखा यही जाता है कि पुलिस की सक्रियता सिर्फ अपनी सुरक्षा तक ही सिमट कर रह जाती है। अव्वल तो पुलिस पदाधिकारी खड़गपुर में टिकना नहीं चाहते हैं। और अगर दिक्कतें भी है तो नक्सली गतिविधि बढ़ने पर अपने आवास की किलाबंदी करा देते हैं।

हालांकि पहली बार खड़गपुर में के. चंद्रा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित होने के बाद रवैया थोड़ा बदला है। खड़गपुर 30 वर्ष पहले भी नक्सल गतिविधि को लेकर सुर्खियों में रहा था। 80 के दशक में खड़गपुर में आधा दजर्न लोग नक्सलियों के शिकार बने थे। 2 फरवरी 1981 को खड़गपुर ङील पथ के निवासी राम नारायण राय की संध्या 5 बजे नक्सलियों ने कुल्हाड़ी के वार से हत्या कर दी थी एवं ‘नक्सलवाड़ी जिंदाबाद’ का नारा लगाया था। हल्ला होने पर पड़ोस के ग्रामीणों ने पांच हमलावरों में से 2 को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

गिरफ्तार पहला व्यक्ति सुजीत मंडल पेसर भोला पंडित ग्राम कासिम बाजार थाना कोतवाली मुंगेर एवं दूसरा व्यक्ति निहार रंजन पेसर ऋषिकेश, ग्राम मथुरा, थाना- चौबीस परगना, पश्चिम बंगाल को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई थी। इस घटना के अलावा उसी वर्ष प्रसन्नडो निवासी मसुदन सिंह की हत्या उनके बासा पर कर दी गई थी। खड़गपुर के विधायक सह पूर्व मंत्री शमशेर जंग बहादुर सिंह के चाचा व बड़े जमींदार राजेंद्र सिंह की हत्या के अलावा बनहरा निवासी रामानंद सिंह की हत्या उनके खेतों पर नक्सलियों द्वारा कर दी गई थी।

इन हत्याओं से उस समय दहशत की स्थिति बन गई थी और भूस्वामी अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। तत्कालीन सरकार ने इसे गंभीरता से लिया था और पुलिस ने अपनी खास शैली से इस पर अंकुश लगाया था। लेकिन 23 फरवरी 2004 को दरियापुर-2 के मुखिया अरुण यादव की नक्सली हत्या से शुरू हुआ सिलसिला अनवरत जारी है। जंगल एवं पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण खड़गपुर के भीमबांध जंगल को नक्सलियों ने अपना सेफ जोन बना लिया है। शुरुआती दौऱ में आर्थिक रूप से कमजोर लोग जुड़े, लेकिन अब दबंगों के भय से भी लोग संगठन से जुड़ रहे हैं।

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