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पूर्व डीजीपी की कोर्ट में उपस्थिति पर रोक

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक बृजलाल व तीन पुलिस महानिरीक्षकों को मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली, जब विशेष अपील पीठ ने शासन की अपील पर एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसका अनुपालन न करने पर सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कल बुधवार को अवमानना मामले में कोर्ट में हाजिर होना था। इन सभी पुलिस अधिकारियों को कल हाजिर होकर अवमानना में अपने विरुद्ध चार्ज बनाने के मुद्दे पर कारण स्पष्ट करना था।

मामले के अनुसार रामराज सिंह हेड कान्स्टेबिल को आउट ऑफ टर्न प्रोन्नति देने को लेकर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रदेश के डीजीपी, एडीजीपी व तीन पुलिस महानिरीक्षकों को निर्देश दिया था। इस आदेश का अनुपालन न होने पर याची कान्स्टेबिल ने अवमानना याचिका दायर की थी। दायर इस अवमानना याचिका पर न्यायालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह, एडीजीपी बृजलाल व तीन पुलिस महानिरीक्षक विजय सिंह, अनंद कुमार सिंह व एकेडी द्विवेदी को अवमानना में चार्ज फ्रेम करने के लिए तलब कर लिया था।

इस तलबी आदेश को अपील में चुनौती दी गयी थी, परन्तु पुलिस अधिकारियों की इस अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दी थी। प्रदेश सरकार ने विवश होकर आज एकल न्यायाधीश के 16 मार्च 09 को पारित उस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी जिसके द्वारा कान्सटेबिल को आउट ऑफ टर्न प्रोन्नति देने का आदेश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सीके प्रसाद व न्यायमूर्ति संजय मिश्र की खंडपीठ ने अपर महाधिवक्ता एसजी हसनैन को सुनने के बाद एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी।

अपर महाधिवक्ता एसजी हसनैन ने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए बहस की कि आउट ऑफ टर्न प्रोन्नति के लिए अदम्य साहस के साथ कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी अथवा उनको मुठभेड़ में मार गिराना आता है। कहा गया था कि याची ने ऐसा कोई काम नहीं किया जबकि उसने केवल हाईकोर्ट के फर्जी आर्डर निकालने वाले गैंग को उजागर किया जो उसकी सेवा का हिस्सा था।

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