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पीठदर्द

कोई किस्मत वाला ही होगा जिसका कभी पीठ दर्द से पाला न पड़ा हो। वरना जरा सी गलती होते ही रीढ़ के स्नायु, पेशियां, जोड़ और हड्डियां अच्छे-अच्छों की नानी याद दिला देते हैं। गलत तरीके से भार उठाने, गलत मुद्रा में सोने, भारी शारीरिक श्रम करने, उठते-बैठते पीठ बल खा जाए, मोच या तनाव से पीठ की पेशियां थक जाएं तो आदमी दर्द के मारे बेहाल हो जाता है। उस वक्त कुछ छोटी-छोटी युक्तियां अमल में लाने से लाभ पहुंचता है। 

पीठ में दर्द हो तो सब काम छोड़ आराम से लेट जाएं। सीधे लेटने से मेरुदंड पर तनाव घट जाता है। अगर पेशियों की ऐंठन लेटने में बाधक हो तो पहले पलंग के कोने पर बैठें, फिर धीरे से पलट कर लेट जाएं। अगले 24-72 घंटों तक पूरा आराम करें।

धीरे-धीरे सामान्य हों : आराम करें मगर बहुत दिनों तक बिस्तर पकड़ना भी ठीक नहीं। जैसे ही दर्द कंट्रोल में आए, लेटे-लेटे ही कमर के हल्के-फुल्के व्यायाम शुरू कर दें। फिर हल्की चहलकदमी भी करने लगें। इससे पीठ की पेशियों का लचीलापन और मजबूती बनी रहेगी।

दर्दनिवारक गोली : दर्द से आराम पाने के लिए कोई भी दर्द-निवारक गोली लें। अगर पेप्टिक अल्सर, अस्थमा, एलर्जी या कोई रक्त विकार है, तो दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें। 

ठंडा सेक : दर्द से राहत पाने के लिए पहले 24-48 घंटों तक ठंडा उपचार करें। कपड़े में बर्फ के टुकड़े लपेट कर उसकी पोटली बना लें। उसे पीठ के दर्दवाले स्थान पर 5-10 मिनट के लिए लगा कर रखें। दिन में 4-5 बार करें।   

गर्म उपचार : 48 घंटे बाद गर्म सेंक का सहारा लें या तौलिए को गर्म पानी में डुबो कर पीठ पर रख लें या फिर हॉट वाटर बॉटल, बिजली का हीटिंग पैड या हीट लैंप इस्तेमाल करें। स्नानघर में गर्म पानी के शॉवर में 5-10 मिनट बिताने से भी आराम मिलेगा।  जारी..

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