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डेट और इक्विटी

ये आम बात है कि विभिन्न उत्पादों के लिए रणनीतियां अलग-अलग होती हैं। निवेश को बेहतर बनाने के लिहाज से और अलग-अलग पोर्टफोलियो को मैनेज करने के लिए रणनीतियां अलग होती हैं। पिछले कुछ वर्षो में पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने के लिए डेट और इक्विटी का मिला-जुला चलन काफी बढ़ा है। इस दौर में ये जरूरी है कि आप पोर्टपोलियो को विभिन्न उत्पादों के द्वारा बैलेंस करें और बेहतर मुनाफा कमाएं।

कई निवेशकों के लिए इक्विटी बेहतर रिटर्न का टिकट होती है। लांग टर्म में इक्विटी अच्छे रिटर्न देने वाले विकल्पों में सबसे प्रमुख है। जहां तक पोर्टफोलियो में इक्विटी की बात है तो शेयर में निवेश कम उम्र से ही करना बेहतर होता है, क्योंकि कम उम्र में आपकी जोखिम लेने की क्षमता ज्यादा होती है। कम उम्र में आप म्यूचुअल फंड और स्टॉक का कांबिनेशन भी ले सकते हैं।

म्यूचुअल फंड जहां आपकी मासिक सेविंग के लिहाज से बेहतर होते हैं, तो स्टॉक लांग टर्म में आपके पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने में मदद करता है। स्कीम और स्टॉक के आधार पर अपने फंड का फैसला न करें। फंड का चुनाव जोखिम लेने की क्षमता और सुविधा के अनुरूप करना ही अच्छा होता है।

ज्यादा उम्र में पोर्टफोलियो में इक्विटी का ज्यादा प्रतिशत नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे जोखिम की संभावना कम हो जाती है। आप चाहें तो पोर्टफोलियो में डेट के हिस्से को शत प्रतिशत रख सकते हैं। हालांकि वर्तमान दौर में ये फैसला ज्यादा मुनासिब नहीं होगा। जहां तक डेट की बात है तो इसमें शॉर्ट टर्म में निवेश करना ही बेहतर रहता है।

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