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सर्दी में और अधिक कटेगी बिजली

कड़ाके की सर्दी पड़ने पर दो घंटे की कटौती पांच से छह घंटे तक बढ़ सकती है। इस मौसम में पचास मिलियन यूनिट खपत बढ़ने की संभावना बिजली विभाग भी जता चुका है, जबकि जरूरत डेढ़ सौ मिलियन यूनिट की है। इतना ही नहीं प्लॉट आवंटित करते समय सभी मूलभूत सुविधाएं देने का वादा करने वाली नोएडा अथॉरिटी की ओर से कोई पहल अब तक नहीं की गई है।

अब दिसंबर और जनवरी की कड़ाके की सर्दियों में नोएडावासियों को और अधिक ठंड झेलनी पड़ेगी। कारण कि ठंड के इन दो माहीनों में बिजली की खपत में वृद्धि होगी, लेकिन इस वृद्धि के लिए बिजली विभाग के पास कोई योजना अब तक नहीं है। ऐसे में नोएडा वासियों को हीटर से अपने ठंडे पड़ चुके हाथों को गर्माना आसान नहीं होगा।

बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता ए.पी.मिश्र का कहना है कि इस समय नोएडा में बिजली की खपत लगभग साढ़े तीन सौ मिलियन यूनिट है। आगामी नवंबर-दिसंबर जैसे ठंड के महिनों में बिजली की खपत में वृद्धि होती है और यह वृद्धि लगभग चार से साढ़े चार सौ मिलियन यूनिट होगी। विभाग बढ़ी हुई खपत को पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर कोशिश की जा रही है।

 

उद्योगों को नुकसान-
औद्योगिक नगरी होने के कारण बत्ती गुल होने का सबसे ज्यादा असर नोएडा के उद्योगों पर पड़ रहा है। औद्योगिक सेक्टरों में बिजली कटौती के कारण एक इंडस्ट्री का रोजाना औसतन पंद्रह से बीस हजार रुपए डीजल पर खर्च होते हैं। नोएडा इंटरप्रिन्योर एसोसिएशन का कहना है कि जनरेटर से उत्पादकता व उत्पाद की गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है। जनरेटर से फैक्ट्री चलने पर औसतन दस फीसदी उत्पादन घट जाता है।


रिहायश को परेशानी-
बिजली कटौती से यहां रहने वालों को भी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। बिजली विभाग का कहना है कि आवासीय सेक्टरों में कटौती दोपहर एक से तीन बजे तक होती है। इस दौरान बिजली की जरूरत नहीं रहती। इसके बाद भी कई घंटे बत्ती गुल रहती है। इधर हर रोज एक मिलियन यूनिट की सप्लाई गावों के लिए नाकाफी साबित हो रही है। गावों में पांच से छह घंटे की कटौती हो रही है। खेती का सीजन होने के कारण इस समय बिजली की जरूरत ज्यादा रहती है। हालांकि विभाग अन्य जनपदों की तुलना कर यहां के गांवों में पर्याप्त बिजली सप्लाई का दावा कर रहा है।

 

लोकल फॉल्ट
लोकल फॉल्ट बिजली विभाग के लिए नासूर बना हुआ है। तारों के टूटने, पेड़ की टहनियों के तार छू जाने से स्पॉर्किग, ट्रांसफॉर्मर जल जाने जैसी घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। इसे सुधारने के लिए तमाम दावे भी किए गए और लोकल फॉल्ट को सुधारने के लिए अथॉरिटी ने 15 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज भी दिया, लेकिन इसका रिजल्ट भी ढाक के तीन पात ही रहा।      

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