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सिख विरोधी दंगों के खिलाफ पंजाब में पूर्ण बंद

1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को अभी तक न्याय न मिलने के विरोध में विभिन्न सिख संगठनों के आह्वान पर मंगलवार को पंजाब में लगभग पूर्ण बंद रहा। बंद शांतिपूर्ण रहा। इस दौरान कोई अप्रिय घटना तो नहीं घटी, लेकिन आम जनजीवन बहुत प्रभावित हुआ। लोगों को रेल तथा सड़क यातायात प्रभावित होने से जहां अपने गणतव्य तक पहुंचने में मुश्किल हुई, वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद होने के चलते रोजमर्रा इस्तेमाल की चीजें मिलने में भी परेशानी हुई। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं, जैसे अस्पताल, क्लीनिक, केमिस्ट शॉप आदि को बंद से मुक्त रखा गया था, लेकिन बैंक कारोबार इससे प्रभावित हुआ। प्रदेश के अधिकतर निजी स्कूल स्कूल बंद रहे तथा निजी बसें भी सड़कों से दूर ही रहीं। सरकारी बसें भी सड़कों पर कम ही दिखाई पड़ीं।  वहीं, कई स्थानों पर रेलगाड़ियां रोकी गईं, जिस कारण लंबे रूट की कई ट्रेनें रद करनी पड़ीं।

सुबह के वक्त ज्यादातर बैंक खुले थे, लेकिन बंद समर्थकों ने कुछ ही समय बाद अधिकतर शहरों इन्हें बंद करवा दिया। इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए पुलिस व प्रशासन ने हर जगह पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। इस सबके बीच बंद के शांतिपूर्वक रहने से सरकार ने राहत की सांस ली। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बंद के दौरान शांति बनाए रखने के लिए इसका आह्वान करने वाले संगठनों का धन्यवाद किया है।

उन्होंने बंद के दौरान कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सिविल एवं पुलिस प्रशासन द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी पर भी तसल्ली प्रकट की है। साथ ही केंद्र को जोर देकर कहा कि 1984 दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पूरी संजीदगी और ईमानदारी से कार्रवाई करते हुए उन्हें सजा दिलवाई जाए, ताकि दंगा पीड़ितों के हरे जख्म कुछ भर सकें।

बंद की कॉल खालसा एक्शन कमेटी, दल खालसा व अन्य सिख संगठनों ने दी थी। इस दौरान अमृतसर, फिरोजपुर और लुधियाना से चलने वाली कई ट्रेनों को रद कर दिया गया। अंबाला-लुधियाना रेल मार्ग पर राजपुरा के पास प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया, जिससे काफी समय तक इस मार्ग पर यातायात बाधित हुआ। फिरोजपुर से दिल्ली, मुंबई आदि को जाने वाली लंबी दूरी की रेलगाड़ियों को रद किया गया, जबकि कम दूरी की ट्रेनें चलती रहीं।

अमृतसर से दिल्ली, नांदेड़ साहिब, हरिद्वार, हावड़ा, अहमदाबाद, जम्मू आदि को जाने वाली लंबी दूरी की रेलगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई रेलगाड़ियां अमृतसर की बजाय लुधियाना, जालंधर से ही चलीं। कुल मिलाकर पंजाब के सभी हिस्सों मालवा, माझा व दोआबा में बंद का बहुत अधिक असर देखने को मिला।

चंडीगढ़ में भी कुछ स्थानों पर बंद समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इस बीच दल खालसा के कंवरपाल सिंह ने कहा कि बंद को प्रदेश निवासियों का पूर्ण समर्थन मिला है, जिसके लिए वह उनका धन्यवाद करते हैं। केंद्र सरकार को इससे सीख लेते हुए दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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