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संचार क्रांति में आज भी पीछे है बिहार

सरकारी संचार क्रांति में भी बिहार पिछड़ गया है। इस क्षेत्र में निजी कंपनियां भले ही बाजी मार रही हो लेकिन सरकारी बीएसएनल बहुत पीछे है। केंद्र सरकार के दस्तावेज से ही पता चलता है कि इस क्षेत्र में भी राज्य की उपेक्षा हुई है। बिहार में इस समय बीएसएनएल के एक्सचेंजों की संख्या सिर्फ 1235 है। वह भी उस हाल में जब यूपीए की पिछली सरकार में संचार राज्यमंत्री डा. शकील अहमद बिहार के ही थे। उन्होंने बिहार पर पूरा ध्यान दिया। राज्य में इस समय बीएसएनएल के फिक्स एवं डब्लू एलएल के के उपभोक्ताओं की संख्या साढ़े इकतीस लाख है।

ऐसी बात नहीं है कि उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर ही एक्सचेंज का निर्माण होता है। हरियाणा में इस श्रेणी के उपभोक्ताओं की संख्या करीब 26 लाख है। मगर एक्सचेंज हैं 1285। यानी बिहार से 50 अधिक। बिहार के दूने से कम (56, 57, 526) उपभोक्ता आंध्र प्रदेश में हैं। वहां एक्सचेंजों की संख्या है 4166। यह बिहार से साढ़े तीन गुणा अधिक है। एक्सचेंज के मामले में मध्य प्रदेश की स्थिति बिहार से बहुत बेहतर है। मध्य प्रदेश में 33 लाख से कुछ अधिक उपभोक्ताओं के लिए 2558 एक्सचेंज बनाए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश में पौने 13 लाख उपभोक्ताओं के लिए 11 सौ एक्सचेंज बनाए गए हैं। उपभोक्ता की संख्या के लिहाज से देखें तो उड़ीसा भी बिहार से आगे है। उड़ीसा में साढ़े 22 लाख से कुछ अधिक उपभोक्ता हैं। एक्सचेंज हैं-1163। पौने छप्पन लाख उपभोक्तावाले राज्य तमिलनाडु में 2030 एक्सचेंज हैं। चेन्नई में अलग से 327 एक्सचेंज हैं। चेन्नई में बीएसएनएन के फिक्स एवं डब्लू एलएल उपभोक्ताओं की तादाद 21 लाख से अधिक है।

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