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सेतुसमुद्रम परियोजना पर सरकार अपना पक्ष बताएः कोर्ट

सेतुसमुद्रम परियोजना पर सरकार अपना पक्ष बताएः कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से कहा कि वह राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान की उस रिपोर्ट पर जल्द अपना पक्ष रखे, जिसमें विवादित सेतुसमुद्रम परियोजना की व्यवहार्यता पर कथित रूप से संदेह जताया गया है।
     
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट पर केंद्र की प्रतिक्रिया जरूरी है क्योंकि उसने तीस जुलाई वर्ष 2008 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था जिसमें पर्यावरणविद आऱके पचौरी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति से परियोजना को एक वैकल्पिक मार्ग से आगे बढ़ाने की व्यवहार्यता जांचने के लिए कहा गया था।
     
प्रधान न्यायाधीश क़ेजी़ बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन एवं न्यायमूर्ति जेएम पांचाल की एक पीठ ने सरकार से कहा कि आपका क्या रुख होगा क्योंकि रिपोर्ट आपके पास हैं और आपको कोई निर्णय लेना है।

पीठ, जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इस दावे कि साथ विवादित सेतुसमुद्रम परियोजना को खत्म करने की मांग की गई है कि राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान को इसकी व्यवहार्यता पर संदेह है।
     
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस चरण पर कोई आदेश जारी नहीं कर रही है और कहा कि परियोजना के कार्यान्वय को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद मामला चूंकि पंद्रह माह से लंबित है, इसलिए सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
     
रिपोर्ट के बारे में स्वामी के दावे पर सवाल करने वाले अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल एच रावल से पीठ ने कहा कि चूंकि आप (सरकार) रिपोर्ट के साथ आए हैं, मामले को कुछ समय के लिए पूरी तरह से लंबित रखा गया है। वह (स्वामी) कह रहे हैं कि चूंकि यह मामला आपकी ओर से लंबित है, आपको अपना पक्ष रखना होगा।

रावल ने इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए ज्यादा समय मांगा। न्यायालय ने उनकी याचिका मंजूरी कर ली। पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 11 और 12 दिसम्बर की तारीख तय की और इस मामले पर समुचित प्रतिक्रिया देने के लिए कहा। स्वामी ने कहा कि पचौरी समिति ने परियोजना की व्यवहार्यता जांचने का जिम्मा राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान को सौंपा, जिसने मार्च में अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी।

पीठ ने रावल से यह जानना चाहा कि सरकार को रिपोर्ट अंतिम रूप से सौंपी गई या नहीं। रावल ने कहा कि यह अनिर्णायक रिपोर्ट है और हमें कुछ ज्यादा आंकड़े चाहिए। रावल ने कहा कि स्वामी ने याचिका में जो बयान दिया है, वह सटीक नहीं है। हम जो कह सकते हैं, वह यह है कि आंकड़े अनिर्णायक हैं।
     
बहरहाल, स्वामी ने मांग की है कि सरकार से कहा जाना चाहिए कि वह निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट के साथ अदालत में हाजिर हो। स्वामी ने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद, आयकर से हासिल धन की बर्बादी है।

स्वामी ने कहा कि परियोजना पूरी तरह से अवैध है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के चक्रवात और विवर्तनिक विश्लेषण के बिना रिपोर्ट तैयार की गई। स्वामी ने याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान का विचार है कि परियोजना को रामसेतु मार्ग के बजाए किसी अन्य वैकल्पिक मार्ग से आगे बढ़ाने पर पर्यावरण पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

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