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बस तारीफ ही करके चले गए चिदंबरम

गृह मंत्री पी. चिदंबरम जमीयत के इजलास में करीब आधा घंटा बोले। आतंकवाद पर जमीयत के रुख की, दारूल उलूम के फतवे की, आजादी की जंग में मुसलमानों की भूमिका की, सबकी दिल खोलकर सराहना की। तारीफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन इजलास में मौजूद हजारों-हजार का सैलाब जो सुनना चाहता था, वह नहीं बोला। न केंद्रीय मदरसा बोर्ड के गठन को लेकर मुसलमानों की चिंताओं को लेकर सरकार के रूख को स्पष्ट किया। रंगनाथ मिश्र आयोग-सच्चर कमेटी की आरक्षण की सिफारिशों को लेकर भी खामोशी बरती। महिला आरक्षण पर भी कोई टिप्पणी नहीं आई।

मुल्क के निजाम में प्रधानमंत्री के बाद सबसे ताकतवर वजीर की आमद से इजलास में उलेमा और मुस्लिम जो उम्मीद लगाए हुए थे, वो उम्मीदे परवान नहीं चढ़ पाई। राहत की बात केवल यह रही कि राज्यसभा के उप सभापति के. रहमान ने मदरसा बोर्ड तथा आरक्षण को लेकर कुछ मरहम लगाने वाली रोशनी दिखाई है।
जमीयत के प्रमुख लीडर मौलाना महमूद असर मदनी से जब मीडिया ने गृहमंत्री की शांत रहने के बाबत पूछा तो उनका सिर्फ यही कहना था कि गृहमंत्री से भला क्या-क्या बुलवाइगा। राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर तो काफी कुछ कह ही चुके हैं।

मालूम हो कि इजलास के दौरान प्रस्ताव तो जमीयत ने 25 पारित किए, लेकिन उलेमाओं की चिंताओं का मुख्य केंद्र केंद्रीय मदरसा बोर्ड तथा आरक्षण का मुद्दा ही था। दोनों ही मुद्दों पर पहले दिन से चर्चा हुई और जोर भी दिया गया। गृहमंत्री के आने यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि इन मुद्दों पर सरकार का रूख काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा। 11.18 मिनट पर गृहमंत्री ने अंग्रेजी में अपना संबोधन शुरू किया।

मौलाना नियाज अहमद फारूकी साथ-साथ उसका तजरुमा करते हुए चल रहे थे। बीच में चिंदबरम के यह कह जाने पर कि यहां मौजूद 10000 उलेमा को खिताब करने का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है तो फारूकी ने भूल सुधारी कि इतनी संख्या तो केवल जमीयत के पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं की है। उपस्थित सैलाब तो कहीं ज्यादा है।

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