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योग के भ्रम मिटाए, भ्रूण हत्या पर साथ जोड़ा

यह हिन्दुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब की ही झलक थी। अक्लियतों की समस्याओं को लेकर गंभीर मंत्रणा के माहौल में जहां योग गुरु बाबा रामदेव का भी गर्मजोशी से स्वागत हुआ तो समाज सुधारक स्वामी अग्निवेश भी नशाखोरी, कन्या भ्रूण हत्या, पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभाव को लेकर अपनी चिंताओं में सभी को शामिल करने में कामयाब रहे।

रामदेव ने साफ कहा कि योग को लेकर कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। यह तो केवल शरीर को दुरुस्त रखने की एक प्रक्रिया भर है। अपने चिरपरिचित अंदाज में बाबा ने माइक संभालते हुए भस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम-विलोम का प्रदर्शन करते हुए कहा कि भला बताइए इसमें कहां से मजहब या धर्म बीच में आ रहा है? भावनाओं को छूते हुए उन्होंने कहा कि सभी जीवमात्र एक ही परमशक्ति का अंश है।

हम हिन्दुस्तानियों का एक ही खून है और पूर्वज भी एक ही हैं। यदि देश और समाज का विकास करना है तो सभी को मिलजुलकर एक साथ ही चलना होगा। उन्होंने भ्रष्ट राजनीतिज्ञों पर भी प्रहार करते हुए देश से बाहर जमा काले धन को वापस लाए जाने की पैरवी की।

बाबा के संबोधन के बाद बारी थी स्वामी अग्निवेश की। उन्होंने बेहद तल्खी से सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किए। बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम के साथ संबोधन शुरू करते हुए उन्होंने नशाखोरी, कन्या भ्रूण हत्या तथा समाज पर टीवी-सिनेमा के जरिए पड़ते दुष्प्रभाव को लेकर उन्होंने सभी से आने आह्वान किया।

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