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दत्तक पुत्र को भी नौकरी पाने का हक

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली के अन्तर्गत परिवार की श्रेणी में दत्तक पुत्र भी शामिल है। उसे वास्तविक पुत्र की तरह मृतक आश्रित सेवा नियमावली के तहत अनुकम्पा नियुक्ित पाने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मृतक के भाई का पुत्र परिवार की श्रेणी में शामिल नहीं है। अत: वह अनुकम्पा नियुक्ित पाने का हकदार नहीं है, भले ही मृतक कर्मचारी का उत्तराधिकार घोषित कर दिया जाए। उत्तराधिकार का मामला लम्बित होने के आधार पर दत्तक पुत्र को नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने दत्तक पुत्र को नौकरी न देने सम्बन्धी आदेश को रद कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने शिव प्रसाद की याचिका पर पारित किया है। याचिका के अनुसार त्रिवेणी सहाय सिंचाई विभाग में ओबरा में चतुर्थ श्रेणी कर्मी था। सेवाकाल के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। जब याची शिव प्रसाद की आयु चार वर्ष थी तब मृतक ने उसे गोद (रािस्टर्ड) लिया था। परिवार रािस्टर के साथ-साथ याची का नाम मृतक के पुत्र के स्थान पर दर्ज था। वह सेवा पंजिका में भी पुत्र के रूप में नामित था। याची ने नौकरी के लिए जब आवेदनपत्र दिया तो विभाग ने इस आधार पर उसके प्रार्थना पत्र को रद कर दिया था कि उसके चाचा के लड़के की ओर से उत्तराधिकार का दावा कोर्ट में लम्बित है। याची के अधिवक्ता दिनेश राय के तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने उपयरुक्त आदेश पारित किया।

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