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मनेरी भाली परियोजनाओं में पानी की कमी, उत्पादन प्रभावित

मनेरी भाली प्रथम व द्वितीय चरण परियोजनाओं की टारबाइनें जलाशय में जलभराव के बाद ही घूम पा रही हैं। गत वर्ष की तुलना में 5 क्यूमेक्स पानी कम होने से दोनों परियोजनाओं से प्रतिदिन पांच सौ मेगावाट से अधिक का नुकसान पहुंच रहा है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फवारी व निचले क्षेत्रों में कोरी ठंड के बाद भागीरथी के जलस्तर में आई गिरावट से जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। गत वर्ष की तुलना में दोनों परियोजनाओं में पानी का डिस्चार्ज लगभग 5 से 10 क्यूमेक्स प्रतिदिन कम हो रहा है। पानी की कमी के चलते दोनों परियोजनाओं के जलाशय में दिनभर जलभराव के बाद ही पिकिंग पर बमुश्किल 90 व 110 मेगावाट उत्पादन लिया जा रहा है।

गत वर्ष की तुलना में 90 मेगावाट की प्रथम चरण में पानी की कमी के चलते एक दिन में जहां 2 हजार मेगावाट उत्पादन लिया जाता, वहीं वर्तमान में 12 सौ मेगावाट ही उत्पादन हो रहा है। 304 मेगावाट की द्वितीय चरण में तो पानी ने टारबाइनें जाम कर दी। यहां चार टारबाइनों में से तीन पूरी तरह बंद है। दिन में 60 मेगावाट उत्पादन, तो पिकिंग में 110 तक उत्पादन लिया जा रहा है। 7.2 मिलियन यूनिट प्रतिदिन उत्पादित करने वाली इस परियोजना से पानी के कमी के चलते इन दिनों 2.5 एमयू ही उत्पादन हो रहा है।

गत कई वर्षों की तुलना में इस बार पानी की कमी से उत्पादन हानि से उत्तराखंड जल विद्युत निगम भी चिंतित हैं। निगम के एमडी आरपी थपलियाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी आई है। उन्होंने फिलहाल द्वितीय चरण में 1108 लेबल मेंटेन कर कुछ समय के लिए जलभराव पर उत्पादन लिए जाने की तैयारी की बात कही।

 
बिजली की आंख मिचौली से लोग परेशान
उत्पादन में आई गिरावट के साथ ही विद्युत आंख मिचौली का खेल शुरू हो गया है। उत्तरकाशी शहर समेत मोरी, पुरोला, बड़कोट, नौगांव, चिन्यालीसौड़, भटवाड़ी आदि स्थानों पर कंट्रोल यूनिट से रोस्टिंग के साथ ही स्थानीय स्तर पर भी बिजली कटौती की जा रही है। गत एक सप्ताह से घण्टों विद्युत गायब रहने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बिना सूचना के बिजली कटौती से व्यापारियों, स्कूली छात्रों, बैंकों, साइबर कैफे आदि व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि कई बार फ्यूज व अन्य समस्याएं आने से बिजली ठप हो रही है। उन्होंने रोस्टिंग कंट्रोल यूनिट ऋषिकेश से ही होने की बात कही।

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