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यूपी के मुख्य सचिव ने कोर्ट से मांगी माफी

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का कथित उल्लंघन करने और लखनऊ में मुख्यमंत्री मायावती सहित दलित नेताओं के स्मारक और प्रतिमाओं का निर्माण कार्य रोकने के अपने ही वादे को तोड़ने के लिए शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगी है।

हलफनामे में मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने कहा कि अगर अदालती निर्देश के अनुपालन में किसी तरह की अवज्ञा या भटकाव हुआ है तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं। शीर्ष अदालत ने गत छह अक्टूबर को मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की थी क्योंकि उन्होंने अदालती आदेश का कथित उल्लंघन किया था। उनसे अदालत में चार नवंबर को निजी तौर पर हाजिर होने को कहा गया था।

अवमानना कार्यवाही इस आधार पर शुरू की गई कि गत मुख्य सचिव ने गत आठ सितंबर को किया अपना वादा तोड़ा और शीर्ष अदालत के स्थलों पर निर्माण गतिविधियां रोकने के गत 11 सितंबर के आदेश का उल्लंघन हुआ। न्यायालय ने राज्य सरकार को यह कहते हुए फटकार लगाई कि वह उसके साथ राजनीति न करे और कहा कि शीर्ष अदालत के आदेशों की अवज्ञा करने के आदेश उच्चतम स्तर से आए प्रतीत होते हैं।

शीर्ष अदालत में दाखिल जनहित याचिका में स्मारकों के निर्माण और प्रतिमाओं की स्थापना को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि परियोजना के लिए करीब 2600 करोड़ रुपये की सार्वजनिक राशि का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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