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साधन से ज्ञान का सीधा सम्बंध नहीं : राज्यपाल

राज्यपाल और कुलाधिपति बीएल जोशी ने कहा, सिर्फ साधन-सुविधाओं और बड़े-बड़े भवनों से शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आती है। इससे ज्ञान का सीधा सम्बंध नहीं है। ध्येय गुणवत्ता लाना होना चाहिए। शिक्षा मंदिरों का वातावारण ऐसा हो कि प्रवेश करते ही इसका एहसास हो। शिक्षा आडंबर से मुक्त होनी चाहिए। श्री जोशी मंगलवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शिक्षकों को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, महात्मा गांधी का नाम जोड़ लेना ही काफी नहीं है। उनका आदर्श और चिंतन भी यहां झलकना चाहिए। सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है। इस बात का निरंतर आकलन होना चाहिए कि हमारा ध्येय क्या है। शिक्षकों को इस बात का निरंतर आकलन करना चाहिए कि उनके कार्य से छात्रों का जीवन सुधर रहा है या नहीं। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किसी में ज्ञान भरकर ‘इनसाइक्लोपीडिया’ बनाना नहीं, बल्कि उसे अच्छा व्यक्ति बनाना भी है, ताकि उसमें उदात्त गुणों का विकास हो और वह समाज के लिए उपयोगी बन सके।

विश्वविद्यालयों में होने वाले सेमिनार, कार्यशाला और संगोष्ठियों का ध्येय भी यही होना चाहिए। काशी की महत्ता का जिक्र करते हुए कुलाधिपति ने कहा, यह आदिकाल से विद्वानों की नगरी रही है। यहां पहले से पढ़ने-पढ़ाने का वातावरण रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, चाहे कितनी पीएचडी हो जाएं और पुस्तकें लिख ली जाएं, लेकिन अगर ध्येय पूरा नहीं होता है, तो सब बेकार है। शिक्षक वही है, जो विद्यार्थी को दे।

उसके अंदर इतना वात्सल्य हो कि वह अपना पूरा ज्ञान उसे प्रदान करे। पाठ्यक्रम और पढ़ाई का तरीका भी ऐसा हो कि विद्यार्थी के साथ भावात्मक लगाव बढ़े। आरंभ में कुलपति प्रो. अवधराम ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय के इतिहास व गतिविधियों से परिचित कराया। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव इंदुपति झा ने किया।
इससे पहले, राज्यपाल का परिसर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।

उन्होंने महात्मा गांधी और शिवप्रसाद गुप्त की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, जहां कुलपति व कुलसचिव इंदुपति झा के साथ वित्त अधिकारी गीतिकना सूर, परीक्षा नियंत्रक प्रो. नंदलाल और चीफ प्राक्टर प्रो. एमबी शुक्ल सहित अन्य शिक्षकों ने कुलाधिपति का स्वागत किया। यहां से राज्यपाल मानविकी संकाय गए और गांधी कक्ष का अवलोकन किया। महिला छात्रवास के विस्तार भवन का शिलान्यास किया।

फिर शिक्षकों को सम्बोधित करने के बाद केंद्रीय पुस्तकालय का भ्रमण कर दुर्लभ पांडुलिपियां देखीं। भारत माता मंदिर का अवलोकन कर वे ललित कला विभाग भी पहुंचे, जहां उन्होंने कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने छात्र-छात्रओं के चित्रों की तारीफ भी की। विभाग की ओर से उन्हें पेटिंग्स भेंट की गई, जिससे गद्गद जोशी ने कहा कि वे इसे राजभवन में लगाएंगे।

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