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फर्जीवाड़े में फंसे एआरटीओ

फर्जी नेशनल परमिट के आधार पर चलने वाले ट्रक को छोड़ने का मामला एआरटीओ प्रवर्तन (द्वितीय) एसएन राम के गले की फांस बन गया है। वाहन अवमुक्त करने के लिए एआरटीओ ने टेलिफोनिक वार्ता का वास्ता दिया है लेकिन आरटीओ सोलन (हिमाचल प्रदेश) ने अपनी रिपोर्ट में इसे फर्जी माना है। वाहन अवमुक्त करने की इतनी जल्दी थी कि रिपोर्ट आने से ठीक एक दिन पहले यह कार्रवाई की गई। इस मामले में उप परिवहन आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। फिलहाल आरटीओ अमृतलाल मामले की जांच कर रहे हैं।

एआरटीओ (द्वितीय) ने 22 अगस्त 2008 को ट्रक (एचपी 12-ए-7632) को रामनगर थाने में निरुद्ध किया था। वाहन का कागजात फर्जी लग रहा था। अगले दिन आरटीओ (सिटी) डा. आरएस यादन ने इसके सत्यापन के लिए आरटीओ सोलन को फैक्स किया। परमिट फर्जी रहता तो जुर्माना पांच हजार और इसकी दस गुनी धनराशि शमन शुल्क के रूप में वसूल की जाती। आरटीओ सोलन ने 29 अगस्त को आरटीओ वाराणसी को रजिस्टर्ड पत्र भेजा कि ट्रक का परमिट फर्जी है।

बताया जाता है कि ट्रक मालिक को इसकी भनक मिल गई। लिहाजा उसने एआरटीओ से सम्पर्क किया। एआरटीओ ने वाहन अवमुक्त करने के आदेश में साफ लिखा है, ‘दूरभाष से बातचीत पर वाहन के प्रपत्र सही पाए गए हैं। वाहन चालक से शमन व प्रशमन शुल्क जमा करा कर अवमुक्त करने की कार्रवाई की जाए।’ अगले दिन आरटीओ सोलन का पत्र रिसीव हुआ तो हड़कम्प मच गया।

मामला लम्बे समय तक दबा रहा लेकिन सूचना के अधिकार के तहत तमाम कागजात मिलने पर परिवहन बार एसोसिएशन ने उप परिवहन आयुक्त आरके उपाध्याय से कार्रवाई की गुजारिश की। निजी लाभ की खातिर ट्रक को छोड़ना इस समय एआरटीओ के लिए गले की फांस बना है।

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