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जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के नाम पर उगाही की शुरू हुई जांच

प्रदेश के उपलोकायुक्त ने जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने के नाम पर की जा रही धन उगाही की जांच शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत मंगलवार को बनारस से की गई। उप लोकायुक्त स्वतंत्र पाल सिंह ने वाराणसी नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस आशय का ब्योरा तलब किया था कि आवेदन के कितने देर बाद जन्म-मृत्यु के प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं? नगर निगम के अधिकारी यह ब्योरा उपलब्ध नहीं करा सके।

श्री सिंह ने बताया कि सभी जिलों से लोकायुक्त कार्यालय में लगातार शिकायतें आ रही हैं कि जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र देने में उगाही की जाती है। लोगों को समय से ये प्रमाण-पत्र नहीं मिलते। जो लोग निकायों के कर्मचारियों को सुविधा शुल्क नहीं देते उन्हें लंबे समय तक लटकाया जाता है।

उन्होंने बताया कि वाराणसी के नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा.बीबी सिंह को जन्म-मृत्यु के विस्तृत विवरण के साथ बुलाया गया था, लेकिन राज्यपाल के कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके मातहत कर्मचारियों ने जनवरी से अब तक हुए जन्म और मृत्यु के मामलों का ब्योरा दिया, लेकिन यह जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके कि लोगों को कितने दिनों के भीतर ये प्रमाण-पत्र जारी किए गए। उन्होंने कहा कि जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र एक हफ्ते के अंदर मिल जाना चाहिए, लेकिन जान बूझकर विलंब किया जाता है।

उप लोकायुक्त ने बताया कि लोकायुक्त कार्यालय में करीब 40 हजार शिकायतें लंबित हैं। सर्वाधिक शिकायतें नरेगा से संबंधित हैं। इन मामलों में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि नरेगा में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में ग्राम पंचायत अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन प्रधानों को दंडित नहीं किया जाता।

प्रधानों की मिलीभगत के बगैर नरेगा में गोलमाल संभव नहीं है। ऐसे में उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि बनारस के पार्षदों की शिकायतों की जांच कर रहे हैं। इस बारे में अभी कुछ कह पाना कठिन है।

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