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डिवोर्स टूरिज्म: चलो कहीं घूमने चलें

डिवोर्स टूरिज्म: चलो कहीं घूमने चलें

नयी अवधारणा को जन्म दिया है-डिवोर्स टूरिज्म। पश्चिमी मुंबई की केवी टूर्स एंड ट्रैवल नामक एक कंपनी ने डिवोर्स टूरिज्म पैकेज की घोषणा की है। आखिर ये पैकेज है क्या? इस कंपनी के मुख्य एग्जीक्यूटिव ऑफिसर विजेश ठक्कर ने फोन पर बताया, हम लोग उन लोगों को एक पैकेज दे रहे हैं, जिनके बीच में प्रेम समाप्त हो चुका है और जो तलाक लेना चाहते हैं। यह पैकेज इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि हम तलाक लेने वाले पति-पत्नी को दोबारा एक साथ ला सकें। उन्हें उस महानगरीय माहौल से कुछ दिन के लिए बाहर निकाल सकें, जहां वे रूटीन जीवन के चलते तलाक लेने की स्थिति में आ पहुंचे हैं। बकौल ठक्कर, हालांकि यह आसान काम नहीं है, लेकिन हम पहले अपने काउंसलर के जरिये उन्हें इस बात के लिए राजी करते हैं कि वे हमारे साथ पर्यटन के लिए चलें। इस पैकेज के दौरान हम लगातार उनकी काउंसलिंग करते रहेंगे और उन्हें प्रेम के वे क्षण याद दिलाने की कोशिश करते रहेंगे, जो कभी उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत थी।

केवी टूर्स एंड ट्रैवल्स को इस कॉन्सेप्ट को बाजार में उतारे अभी मुश्किल से दो माह का ही समय हुआ है और इस दौरान इस पैकेज को लेने के लिए 12 से भी अधिक कपल्स तैयार हो चुके हैं। बकौल ठक्कर, यह पैकेज लेने वालों में महाराष्ट्र, मुंबई, दुबई और पाकिस्तान तक के कपल्स हैं। इस टूर पैकेज का इनके जीवन पर क्या असर पड़ता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा, लेकिन इतना तय है कि पर्यटन उद्योग में हैल्थ टूरिज्म, फैशन टूरिज्म और बॉलीवुड टूरिज्म के बाद डिवोर्स टूरिज्म नामक एक नयी अवधारणा जुड़ गयी है। हालांकि दिल्ली का पर्यटन उद्योग इस तरह की अवधारणा पर कोई काम नहीं कर रहा, लेकिन वह जनता है कि यूरोपियन देशों में डिवोर्स टूरिज्म खासा लोकप्रिय है। वहां इसकी लोकप्रियता इसलिए भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि वहां तलाक दर भारत के मुकाबले बहुत ज्यादा है। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में ही हर दो शादियों में से एक का अंत तलाक के रूप में होता है, जबकि भारत में हर 100 शादियों में से महज 1.1 शादी ही तलाक तक पहुंचती है।


यही वजह है कि अभी डिवोर्स टूरिज्म की अवधारणा को स्वीकार करने में लोगों को दिक्कत हो सकती है, लेकिन यदि तलाक के मामले इसी तरह बढ़ते रहे तो इसमें कोई शक नहीं कि डिवोर्स टूरिज्म आने वाले समय में लोकप्रियता हासिल कर सकता है। दिल्ली में, स्टिक ट्रैवल्स प्राइवेट लि. की ईषा गोयल का कहना है, भारत में अभी भी लोग इस तरह के निजी मामलों में बहुत ज्यादा खुले नहीं हैं, इसलिए वे इस टूरिज्म को कितना अपना पायेंगे, नहीं कहा जा सकता। लेकिन उनका यह भी कहना है कि हमारे समाज में खुलापन आ रहा है और लोग तलाक जैसे मुद्दों पर भी दूसरों से चर्चा करने लगे हैं। और यदि इस तरह के टूरिज्म से सचमुच लोगों का वैवाहिक जीवन बच सका तो यह बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो सकता है।

यह पैकेज इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि तलाक लेने वाले पति-पत्नी को दोबारा एक साथ लाया जा सके। उन्हें उस महानगरीय माहौल से कुछ दिन के लिए बाहर निकाला जा सके, जहां वे रूटीन जीवन के चलते तलाक लेने की स्थिति में आ पहुंचे हैं।

तमाम कारणों के चलते देश में तलाक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि विदेशों में होने वाले तलाक के मुकाबले इनकी संख्या बेहद कम है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया ज सकता कि तलाक अब पहले की तरह ऐसा विचार नहीं रहा, जिसके बारे में लोग बातचीत करने से भी कतराते हों। लिहाज महानगरों में तो तलाक के मामलों में वृद्धि हो ही रही है। ऐसे में बाजार ने डिवोर्स टूरिज्म नामक एक अवधारणा को जन्म दिया है।

भारत में हर 100 शादियों में से महज 1.1 शादी ही तलाक तक पहुंचती है

तलाक के मुकदमे दायर करने वालों में 70% की उम्र 25-35 साल के बीच है यानी तलाक दायर करने वाले नयी पीढ़ी और नये मूल्यों के लोग हैं।

अमेरिका में हर दो शादियों में से एक का अंत तलाक के रूप में होता है।

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