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रामचरित मानस को लेकर छिड़ी महाभारत

रामचरित मानस को लेकर छिड़ी महाभारत

हिन्दुओं के पवित्र ग्रन्थ रामचरित मानस में जगतगुरु रामभद्राचार्य के संशोधन को लेकर सन्तों में भारी रोष के साथ ही इस पर महाभारत छिड़ गई है।

सन्तों ने स्वामी राम भद्राचार्य को आठ नवम्बर तक माफी मांगने की चेतावनी के साथ ही संशोधन को वापस लेने के लिए कहा है। अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि यदि श्री राम भद्राचार्य आगामी रविवार तक माफी नहीं मांगते तो दस नवम्बर को हरिद्वार में होने वाली अखाडा परिषद की बैठक में इनका जगतगुरु का पद छीन लिया जाएगा और इनके बहिष्कार की घोषणा की जाएगी।

महंत ज्ञानदास ने कहा कि राम भद्राचार्य जी ने सुन्दर काण्ड के 44वें दोहे, बालकाण्ड के दोहा नम्बर 206वें समेत रामचरित मानस में तीन हजार गलतियां निकालने का दावा किया है।

महंत ज्ञानदास ने कहा कि स्वामी राम भद्राचार्य अपनी नई रचना के माध्यम से रामचरित मानस को विवादित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अखाडा परिषद की बैठक में राम भद्राचार्य की नई कृति को भी रखा जा सकता है।

दूसरी ओर हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र रामचरित मानस को 387 वर्ष बाद चुनौती देने वाले नेत्रहीन जगतगुरु स्वामी राम भद्राचार्य ने कहा कि उन्होंने तुलसीकृत रामचरित मानस में बदलाव या संशोधन नहीं केवल सम्पादन किया है।

चित्रकूट के तुलसी पीठ के जगतगुरु राम भद्राचार्य का कहना था कि उन्होंने आठ वषों की शोध के बाद जरुरी समझने पर यह सम्पादन किया। उनका दावा है कि उन्हें लगा कि तुलसीकृत रामचरित मानस का सम्पादन करने वाली अवधी भाषा के जानकार थे लेकिन हठधर्मी भी थे। इसलिए उन्होंने तुलसीकृत रामचरित मानस का सम्पादन किया।

उन्होंने कहा कि यह सही है कि उनके द्वारा रचित मानस के पेज नम्बर 59 पर उनके समर्थकों ने उन्हें ऋषि कहने की कोशिश की है लेकिन वह इसे गलत नहीं मानते। उन्होंने कहा कि व्याकरण, भाषा और मात्रा को लेकर उन्होंने करीब तीन हजार सम्पादन किया है। उन्हें लगता है कि कुछ लोग उनके खिलाफ साजिश करके जबरदस्ती विवाद खडा कर रहे हैं। नेत्रहीन स्वामी राम भद्राचार्य ने अपने आलोचकों को योग्य निर्णायकों के समक्ष इस पर सहस्त्रर्थ करने की चुनौती दी है।

इस बीच श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा कि तुलसीकृत रामचरित मानस पर हजारों लोगों ने शोध किया है। विदेशों में भी इस पर शोध होते रहते हैं। किसी को कोई गलती नहीं मिली तो नेत्रहीन राम भद्राचार्य को कैसे गलती मिल गई।

श्री नृत्य गोपाल दास ने कहा कि यदि स्वामी राम भद्राचार्य को राम कथा को अपने ढंग से करना था तो वह अपना ग्रन्थ लिखते तो शायद किसी को कोई आपत्ति न होती लेकिन रामचरित मानस से छेड़छाड़ कर उन्होंने अक्षम्य अपराध किया है।

गौरतलब है कि स्वामी राम भद्राचार्य कार्तिक मेले में अयोध्या में राम कथा करने आ रहे थे लेकिन साधु-सन्तों के विरोध की वजह से उन्हें अपना कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।

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