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एक मंच पर उतरी देश की सांस्कृतिक एकता

कला का माध्यम भाषायी अज्ञानता को ढंक लेता है, चाहे मणिपुर का डांस हो या छत्तीसगढ़ का छऊ। गुड़गांव वासियों के लिए एक ऐसा ही स्टेज पर डांस करते कलाकारों और दर्शकों के बीच अनोखा सम्मोहन देखने को मिला। इस कार्यक्रम में भाषा की अनभिज्ञता हावी नहीं हुई।

रविवार शाम को रोटरी पब्लिक स्कूल में आयोजित अखिल भारतीय नृत्य और नाटक प्रतियोगिता कार्यक्रम मणिपुरी, छऊ, बिहू और कत्थक के नाम रहा। घंघुरुओं के लय और कलाकारों की सधे हुई भंगिमाओं ने दर्शकों को कुर्सियों से चिपकाए रखा। कार्यक्रम का उद्घाटन पुलिस कमिश्नर एसएस देशवाल ने किया। उन्होंने कहा कि आज के समाज को कलाकारों और संस्कारों की जरूरत है।

कार्यक्रम के शुरुआत में शोभना झा ने कत्थक पेश किया। चार खंडों में छऊ डांस छत्तीस गढ़ के दिलई से आए नृत्य धाम समूह ने पेश किया। मणिपुर से मणिपुर फिल्म अकेडमी के कलाकारों ने मणिपुरी डांस की प्रस्तुति की। आसाम से आए समूह ने बिहू पेश किया।

सोमवार को कार्यक्रम में तीन नाटकों की प्रस्तुति हुई। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से आए कलाकारों ने नाटक 'गांधी ने कहा था' का मंचन किया। मणिपुरी फिल्म अकेडमी ने मणिपुरी नाटक प्रस्तुत किया, जिसका हिंदी अनुवाद था 'किराए का घर'। नाटक देखने वालों को नाटक को हिंदी में अनुवाद भी बताया जा रहा था। कानपुर के रंगकर्मियों की प्रस्तुति थी 'प्रगति की ओर'। इस मौके पर निष्ठा के  महासचिव संजय भसीन ने बताया कि कार्यक्रम में 20 नाटक पेश किए जाएंगे। चार दिनों के इस कार्यक्रम में 50 एकल प्रस्तुतियां भी होंगी।

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