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बिजली निगम में कर्मचारियों की कमी

बिजली निगम में कर्मचारियों की भारी कमी है। निगम के पुराने कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनके स्थान पर नए कर्मचारियों की नियुक्तियां न के बराबर हैं। इससे विभाग में ट्रैंड कर्मचारियों की कमी होती जा रही है। विभाग में थोड़े बहुत जो कर्मचारी बचे हैं, वे या तो सेवानिवृत्त के करीब हैं या फिर इतने बुजुर्ग हो गए हैं कि वे बिजली खंभे पर आसानी से नहीं चढ़ पाते।

उपभोक्ताओं को बिजली ठीक कराने में पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। ऐसे में कुछ सब-डिविजनों में निजी तौर पर रखे गए प्राइवेट कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है। फरीदाबाद सर्कल में चार डिवीजन हैं। इनमें कोई डिवीजन ऐसी नहीं, जिसमें 30 से 40 फीसदी कर्मचारियों की कमी न हो। हर महीने बिजली के नए कनेक्शन लेने के लिए सब-डिविजनों में उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग जाती है, इससे बिजली निगम में अव्यवस्था का आलम है।

निगम में तैनात अधिकारी व कर्मचारी काम के बढ़ते बोझ के चलते मानसिक दबाव में हैं। कई सब-डिवीजनों में तैनात कनिष्ठ अभियंताओं ने प्राइवेट तौर पर बिजली कर्मचारी रखे हुए हैं, जो बिजली मीटर लगाने से लेकर खंभे पर चढ़कर कनेक्शन देने व लाइन में आए फॉल्ट को दूर करने तक का काम करते हैं। कनिष्ठ अभियंता उन्हें अपने स्तर पर वेतन देते हैं। गुलशन नागपाल ने बताया कि सब-स्टेशनों पर स्टॉफ की कमी नहीं। डीसी रेट पर कर्मचारियों की तैनाती सब-स्टेशनों पर की गई है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या 25 फीसदी से अधिक है।

कर्मचारियों के संकट को देख पिछले दिनों बिजली निगम में ठेके व आउटसोर्सिंग के जरिए डीसी रेट पर बिजली कर्मचारियों की अस्थाई नियुक्तियां की गईं। ये कर्मचारी भी पूरी तरह ट्रैंड नहीं हैं, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। अकुशल कर्मचारी होने के चलते कई बार दुर्घटनाएं भी हुई हैं। अब तक कई अकुशल कर्मचारी अपनी जान तक गवां चुके हैं।

दिल्ली जोन के चीफ इंजीनियर एके जैन के मुताबिक, निगम में 40 फीसदी कर्मचारियों की कमी है। इनमें से 20 फीसदी कर्मचारियों की कमी डीसी रेट पर ठेकेदार के कर्मचारी लगाकर की गई है। राज्य में नई सरकार बनी है। जेई व एसडीओ स्तर के इंटरव्यू चल रहे हैं। अन्य रिक्त पदों को भरने का काम भी सरकार का है।
इधर कर्मचारी नेता सुभाष लाम्बा का कहना है कि उनकी यूनियन रेग्यूलर कर्मचारियों की भर्ती को लेकर कई बार मांग उठा चुकी है। प्राइवेट कर्मचारियों से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। वे बिना पैसे उपभोक्ताओं का काम नहीं करते। इससे महकमा बदनाम होता है। डीसी व आउटसोर्सिंग के जरिए लगाए गए कर्मचारियों के स्थान पर स्थाई नियुक्ति की जानी चाहिए। अकुशल कर्मचारियों के चलते बिजली लाइनों पर हादसों की संख्या बढ़ रही है।

बिजली विभाग में सुप्रीटेंडेंट, यूडीसी, एलडीसी, मीटर-रीडर, लाइनमैन, सहायक फौरमैन, सहायक लाइनमैन, एसएसए, एसए एचवीपीएन आदि पद रिक्त हैं। फरीदाबाद सर्कल में डिविजन में एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, पलवल व बल्लभगढ़ एचवीपीएन के सब-स्टेशन आते हैं।

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