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धान का भाव न मिलने से किसान परेशान

क्षेत्र के किसानों को जीरी का अच्छा भाव नहीं  मिल रहा है। इतना ही नहीं मंडियों में बोली लगाने वालों के सामने भी किसानों को गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। ऐसे में मंडी में बैठा किसान जुमला कहने लगा है कि कांग्रेस तेरे राज में जीरी गई ब्याज में। पिछले वर्ष यही किसान अच्छा भाव मिलने से खुश होकर कह रहा था कांग्रेस तेरे राज में जीरी गई जहाज में। यहां की मुख्य अनाज मंडी व सहयोगी मंडियों में यही हो रहा है।

किस्म 1121 धान का भाव 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गया है। पिछले वर्ष यही भाव 3000 रुपए प्रति क्विंटल तक किसान को आसानी से मिला था। इसी उम्मीद में किसान ने पहले की अपेक्षा इस बार अधिक जीरी लगाई थी। रोहतक जिला में हालांकि लक्ष्य से अधिक जीरी नहीं मिल रही है, लेकिन जो है उसकी किसानों को कीमत नहीं मिल रही है।

छोटे किसान अपनी जीरी लेकर मंडी में जा रहा है तो आढ़ती इसकी बोली लगाने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। किसान अपनी जीरी बेचने के लिए आढ़ती के सामने बोली के लिए गिड़गिड़ा रहा है। आढ़ती है कि उसको समय नहीं दे पा रहा है। पहले बारिश न होने की वजह से किसानों ने अपना पैसा डीजल से सिंचाई में खूब बहाया उसके बाद अधिक बारिश हो गई तो बहुत सी फसल पानी में डूब गई। दोतरफा नुकसान। इस बार उचित भाव न मिलने की वजह से किसानों में सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी है।

माना जा रहा है कि मंडियों में आढ़तियों की मनमानी चल रही है। सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। रिठाल गांव के कृषि क्लब के प्रधान कुलबीर फौगाट ने कहा कि चुनाव से पहले वे मंडी में भाव की उम्मीद में नहीं गए। उम्मीद थी कि चुनाव के बाद फसल का अच्छा भाव मिलेगा। मगर सरकार बनने के बाद वह भी किसानों की हितैषी कही जाने वाली सरकार बनने के बाद भी भाव नहीं मिला है।

हैरानी की बात तो यह है कि बड़े जमींदारों ने जीरी का स्टाक करना शुरू कर दिया है। जिन किसानों के पास धान रखने की जगह नहीं है या फिर जिन किसानों ने मंडी के आढ़तियों का कर्ज चुकाना है वे ही अपनी जीरी लेकर मंडियों की ओर जा रहे हैं। भालौठ के किसान यशपाल ने बताया कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ही नहीं सोनिया गांधी ने भी झज्जर की रैली में किसानों के हित की बात की थी। किसान परेशान है कि जीरी का भाव नई सरकार बनने के बाद और भी घट गया।

जीरी का भाव जमीन पर आने के बारे में बात करने के लिए न तो सरकार का कोई नेता और न कोई अधिकारी सुनने के लिए तैयार है। मार्केट कमेटी व कृषि विभाग के अधिकारी भी फोन बंद किए हुए हैं। रोहतक की मंडी की अव्यवस्था व भाव न मिलने से यहां के किसान गोहाना की मंडी में जा रहे हैं। मगर उनका दुर्भाग्य यह है कि वहां की मंडी में भी धान का उचित भाव नहीं मिल रहा है।

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  • Web Title:धान का भाव न मिलने से किसान परेशान